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आती है शिकायतें, होती है जांच, पर सुधार नहीं

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सहारनपुर। कुपोषण के खात्मे को लेकर तमाम कवायद होती है। सुपोषण माह भी चलाए जाते हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिकाओं का भी निर्माण हुआ। पोषाहार भी हर माह बांटा जाता है, लेकिन इसके बावजूद पोषाहार में कटौती किए जाने की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। आइजीआरएस पर हर तीसरे दिन 25 से 30 शिकायतें दर्ज की जाती हैं। जांच भी होती है, लेकिन व्यवस्था में बदलाव नहीं हो पाया है।
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नई व्यवस्था के तहत शासन ने रोजगार देने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों को पोषाहार वितरण प्रणाली से जोड़ा। इसके तहत कोटेदार के यहां गेहूं व चावल लेकर स्वयं सहायता समूह इनके एक व डेढ़ और दो किलो तक के पैकेट तैयार कर आंगनबाड़ियों को सौंपते हैं। इसके बाद ही कुपोषित बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं तक शुष्क पोषाहार के पैकेट पहुंचाती हैं, लेकिन पोषाहार में गड़बड़ी की शिकायतें भी नियमित सामने आ रही हैं। किसी पैकेट मेें 100 ग्राम तो कई 200 ग्राम कटौती का आरोप लगाकर आईजीआरएस पर करता है, जिसके बाद शासन की ओर से इन शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों के पोर्टल पर ट्रांसफर किया जा रहा है, जिनकी जांच भी हो रही है, लेकिन व्यवस्था में बदलाव नहीं हो पाया है। जनपद में 25 से 30 शिकायतें पोषाहार से संबंधित हर तीसरे दिन दर्ज की जा रही है।
चार वर्षों घटा कुपोषण, पर संख्या अब भी बहुत ज्यादा
सहारनपुर। चार वर्षों में कुपोषण के खात्मे को लेकर विभिन्न अभियान चलाए गए। कुपोषितों की संख्या में कमी भी आई, लेकिन आंकड़े में अभी बड़ी संख्या में जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे हैं। वर्तमान में 20 हजार कुपोषित और 1500 अति कुपोषित बच्चे हैं।
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वर्ष ------- कुपोषित ----- अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2018 ------ 41869 --------- 12547
2019 ------ 33825 ---------- 6910
2020 ------ 21315 ---------- 4375
2021 मई तक 20255---------1501
बड़ी संख्या में शिकायतें आती हैं, जिनको उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाकर निस्तारण भी कराया जाता है। पात्र बच्चे, गर्भवती व धात्री महिलाओं को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। -आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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