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नाम तो बदला, नहीं बदले हालात, यातायात व्यवस्था खराब

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सहारनपुर में रात में छाये कोहरे में जाते वाहन - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। 20 बरस में सहारनपुर शहर में कई बदलाव आए हैं। नगर पालिका परिषद से नगर निगम भी बना है, लेकिन कई चीजें आज भी वैसी ही हैं, जैसी पहले थी। अतिक्रमण शहर की कई समस्याओं की जड़ है। अस्पताल, स्कूल और पुलिस स्टेशनों में सुविधाएं तो बढ़ीं, लेकिन व्यवस्थाएं पहले जैसे ही चल रही हैं। इसी प्रकार शहर में परिवहन व्यवस्था में शासन या प्रशासनिक स्तर से कोई सुधार नहीं हुआ है। सिटी बसों के संचालन की बात कई बार सामने आई, मगर योजना परवान नहीं चढ़ी। नतीजा शहर भर में अतिक्रमण और उसकी वजह से जाम और अन्य समस्याएं पहले से अधिक बढ़ी हैं। पेश है रिपोर्ट...
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शहर की परिवहन व्यवस्था चौपट
शहर में सिटी बसें चलाने के लिए नगर निगम अधिकारियों द्वारा समय-समय पर घोषणाएं की जाती रही हैं, लेकिन आज तक योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। खास बात यह है कि शहर में सिटी बसों के संचालन के लिए सड़कों पर जगह ही नहीं है, जिसका प्रमुख कारण अतिक्रमण है। अतिक्रमण को लेकर नगर निगम का रवैया हमेशा से नरम रहा है, जिसका नतीजा यह है कि अतिक्रमण कई समस्याओं की वजह बना हुआ है। नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधा देना स्मार्ट सिटी योजना का भी अहम हिस्सा है, मगर अभी तक इसे लेकर कोई प्लान स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के पास नहीं है। नतीजा, शहर भर में बेतरतीब तरीके से टेंपो और ई-रिक्शा स्टैंड बने हैं। टेंपो और ई-रिक्शों की भरमार इतनी है कि वह जाम की वजह बनते हैं।
सरकारी स्कूलों में हुईं केवल घोषणाएं
नगर के सरकारी विद्यालयों की स्थिति में भौतिक सुधार तो हुआ है, मगर सुविधाओं के लिए केवल घोषणाएं हैं। परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प योजना के तहत सुधार कार्य हुए हैं। कुछ विद्यालयों में आईटीसी ने बेहतर कार्य किया है। स्मार्ट सिटी के तहत बनने वाली स्मार्ट क्लास का कार्य करीब एक साल से बंद है। गांधी पार्क स्थित विद्यालय की तरह अनेक विद्यालयों की स्थिति खराब है। साथ ही तीन राजकीय माध्यमिक विद्यालय खुलने से शिक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है।
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पोस्ट ऑफिस में बदला काम का तरीका
शहर में जीपीओ रोड पर मुख्य डाकघर है, जिसमें पहले पोस्ट से जुड़े केवल सामान्य कार्य होते थे, मगर अब वह निजी स्पीड पोस्ट कंपनियों की तरह काम कर रहा है। पोस्ट ऑफिस में एक ओर जहां पूरी तरह से कागजी रिकॉर्ड की जगह कंप्यूटर स्थापित हो चुके हैं। वहीं अब यहां पासपोर्ट के लिए आवेदन और अन्य कार्य भी किए जा रहे हैं। डाक विभाग की ऋण की लेन-देन की व्यवस्था भी बड़े बैंकों की तरह हुई है।
सरकारी अस्पताल में बढ़ी सुविधाएं
बीते 20 साल में सरकारी अस्पताल में भी व्यवस्थाओं में सुधार आया है। एक ओर जहां जिला महिला अस्पताल को नई इमारत मिली है, वहीं एसबीडी जिला अस्पताल में सीटी स्कैन, ट्रामा सेंटर, ऑक्सीजन व्यवस्था में सुधार और जांच की अनेक सुविधाएं बढ़ी हैं।
पुलिस स्टेशनों में बदलाव
पुलिस स्टेशनों की बात करें तो इनमें काफी सुधार दिखा है। एक ओर जहां पुलिस स्टेशन वाईफाई और कंप्यूटर से लैस हुए हैं, वहीं सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी लगाए गए हैं। थानेदारों के कार्यालयों का कायाकल्प हुआ है। खास बात यह है कि डायल 112 जैसे गश्ती वाहनों की संख्या बढ़ी है, जिससे सुरक्षा में इजाफा हुआ है।
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