सहारनपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने के नाम पर जनपद के सरकारी अस्पतालों ने लाखों रुपया क्लेम का ले लिया है। क्लेम का यह पैसा मरीजों की सुविधा पर खर्च होना चाहिए, मगर खर्च होने की बजाय सरकारी अस्पतालों के खातों में पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से गाइडलाइन जारी नहीं होने की वजह से पैसा खर्च नहीं कर पा रहे हैं।
योजना में शामिल परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर विशेष इलाज दिए जाने का प्रावधान है। मगर सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान के मरीजों को भी सामान्य मरीजों की तरह सुविधाएं दी जा रही हैं। यह स्थिति तब है, जबकि सरकारी अस्पताल योजना के तहत मरीजों के इलाज के नाम पर लाखों रुपया क्लेम का ले चुके हैं। नियमानुसार सरकारी अस्पतालों में क्लेम के तौर पर आने वाला पैसा आयुष्मान भारत योजना के मरीजों को बेहतर से बेहतर सुविधा देने पर खर्च होना चाहिए। मगर मार्च 2019 से चल रही योजना में सरकारी अस्पताल अभी तक एक हजार से अधिक मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत कर चुके हैं, जिनके इलाज के नाम पर 3109800 रुपये का क्लेम भी ले चुके हैं। योजना शुरू होने के नौ माह बाद भी आयुष्मान के मरीजों को पर्चा बनवाने के लिए सामान्य मरीजों के साथ घंटों कतार में खड़े होना पड़ता है। ओपीडी में भी कई बार मरीज को सामान्य तरीके से ही ट्रीट किया जाता है। मरीजों का वार्ड सामान्य वार्ड की तुलना में बेहतर सुविधाओं वाला होना चाहिए, मगर ऐसा भी नहीं है। विशेष मरीजों वाली तमाम सुविधाएं अभी तक नदारद हैं। अधिकारियों का कहना है कि क्लेम के तौर पर लिए गए पैसे को खर्च करने के लिए अभी शासन से कोई गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। यही वजह है कि वह अपनी मर्जी से पैसे को खर्च नहीं कर पा रहे हैं।
योजना से जुड़े हैं 34 अस्पताल
जनपद में योजना से 34 अस्पताल संबद्ध हैं, जिनमें 15 सरकारी और 19 गैरसरकारी अस्पताल शामिल हैं। 15 सरकारी अस्पतालों में छह अस्पताल करीब नौ माह से जुड़े हुए हैं, जबकि नौ सीएचसी को हाल ही में शामिल किया गया है।
किस अस्पताल को कितना क्लेम
एसबीडी जिला अस्पताल-----------929000
जिला महिला अस्पताल-------------1110100
मेडिकल कॉलेज----------------------647800
सीएचसी फतेहपुर--------------------57200
सीएचसी देवबंद----------------------273000
सीएचसी गंगोह----------------------92700
सीएमएस का दावा
एसबीडी जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर सुनित कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि क्लेम का पैसा खर्च करने के लिए अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं मिली है। फिर भी वह योजना के तहत भर्ती होने वाले मरीजों की दवाओं, बाहर से खरीदे जाने वाले सामान आदि पर पैसा खर्च कर रहे हैं। अभी तक मरीजों को आईसीयू में रखा जाता है, क्योंकि इससे बेहतर वार्ड अभी तक हमारे पास नहीं है। हमारी योजना इमरजेंसी की बगल में चार कमरों का विशेष वार्ड बनाने तथा अलग से फ्री पर्चा बनाने का काउंटर खोलने की है। बाकी जैसे निर्देश शासन से मिलेंगे उनका अनुपालन किया जाएगा।
आयुष्मान भारत योजना में सहारनपुर अच्छा काम कर रहा है। रही बात सरकारी अस्पतालों में योजना के मरीजों को विशेष इलाज की तो जो भी संसाधन हैं उनमें बेहतर से बेहतर सुविधा देने की कोशिश की जा रही है। क्लेम का पैसा खर्च करने को लेकर अभी तक गाइडलाइन नहीं आई है। ऐसी स्थिति में हम अपनी मर्जी से पैसा खर्च नहीं कर सकते हैं।
डॉक्टर बीएस सोढ़ी, सीएमओ।