गंगोह के गांव सांगाठेडा में ग्रामीणों से बात करते कोतवाली प्रभारी पीयूष दीक्षित। संवाद
गंगोह/तीतरों। गांव सांगाठेड़ा में नेहा रोहिला के तीज्जे पर उसकी एवं बच्चों की अस्थियां उठाई गईं। इसके बाद उन्हें विधि विधान से हरिद्वार ले जाकर गंगा में प्रवाहित कर दिया गया।
बृहस्पतिवार को जब नेहा रोहिला और उसके तीनों मासूम बच्चों श्रद्धा, देवांश एवं शिवांश की अस्थियां उठाई गईं, तो सागांठेड़ा गांव के हर बाशिंदे का दिल दर्द से कराह उठा।
अस्थियां उठाते हुए अक्षय रोहिला और हेमंत रोहिला खुद को संभाल नहीं सके और दहाड़ मारकर रोने लगे। अन्य परिजनों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला। उनका विलाप सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू बहने लगे। दादी मीना बोली यह मेरे बच्चों की आखिरी निशानी थी, अब यह भी मुझसे छिन गई।
हरिद्वार में हर की पैड़ी पर नेहा और उनके मासूम बच्चों की अस्थियों का गंगा में विसर्जन किया गया।
इस दौरान हेमंत और योगेश रोहिला के मामाओं ने धार्मिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार पूरा कराया। उधर, सांगाठेड़ा गांव में अब भी मातम पसरा है, हर कोई स्तब्ध है। हर गली, हर चौपाल पर ग्रामीण योगेश रोहिला के इस कृत्य की ही चर्चा कर रहे हैं।