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Saharanpur News: पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है डाट काली मंदिर

Sat, 21 Mar 2026 01:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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छुटमलपुर। सहारनपुर-देहरादून सीमा पर स्थित डाट काली मनोकामना सिद्धपीठ पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि माता सती का कंठ यहां गिरा था। अंग्रेजी शासन के दौरान टनल खोदाई के दौरान 1804 में मंदिर का निर्माण हुआ था और पिछले सौ साल से यहां अखंड ज्योति जल रही है। माता भक्त विशेष रूप से नए वाहनों की पूजा कराने यहां पहुंचते हैं। नवरात्रि पर मंदिर में दिन भर श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है।
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डाट काली मंदिर सहारनपुर जिला मुख्यालय से देहरादून मार्ग पर 55 किमी दूर शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित है। शक्ति की उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि पर यहां तड़के पांच बजे से ही भक्तों की भीड़ पहुंचने लगती है। यहां के बारे में मान्यता है कि माता डाट की चुनरी बंधवाने से भक्तों के वाहन की स्वयं रक्षा होती है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग रोज नए वाहनों की पूजा करवाने मंदिर पहुंचते हैं।
मां डाट काली को लाल फूल, नारियल, लाल चुनरी और गुलदाने का प्रसाद चढ़ाने का विशेष महत्व है। मंदिर में मां डाट काली के साथ ही हनुमान, गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्तजन यहां भंडारा भी करते हैं।
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माता के सती होने के दौरान यहां गिरा था कंठ



मंदिर के पुजारी महंत रमन प्रसाद गोस्वामी बताते हैं कि माता के सती होने के दौरान उनका कंठ यहां गिरा था। वर्ष 1804 में जहां अंग्रेज सहारनपुर-देहरादून मार्ग के निर्माण के दौरान टनल बना रहे थे तो बार-बार मिट्टी गिर जाती थी। तब माता सपने में आई और बताया कि यहां मेरी पिंडी है और उसकी प्राण प्रतिष्ठा करो। तब मंदिर का निर्माण कराया गया, जिसके बाद टनल का निर्बाध रूप से निर्माण संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि नवरात्रि में नौ दिन माता की चार पहर की आरती की जाती है। नौ दिन तक लगातार पंडित पाठ करते हैं।



सुरंग पार है माता भद्रकाली का मंदिर

डाट काली मंदिर के आगे पुरानी सुरंग के दूसरी तरफ देहरादून की सीमा में माता भद्र काली का मंदिर है। बताया जाता है कि मुगलों से लड़ते हुए नेपाली सेनापति बलभद्र सिंह राजपूत यहां तक आ पहुंचे थे लेकिन मुगलों ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। उन्होंने इष्ट देवी माता की उपासना की। माता ने एक स्थान पर दबी अपनी मूर्ति खोज कर स्थापित करने की आज्ञा दी। बलभद्र ने ऐसा ही किया जिसके बाद उन्होंने मुगलों को दिल्ली तक खदेड़ दिया था।
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