एक सपा नेता ने इंटरलॉकिंग टाइल्स की फैक्ट्री लगा रखी है। ऐसे में ज्यादातर सरकारी विभागों में ठेकेदारों को मौखिक आदेश है कि टाइल्स उसकी फैक्ट्री की होनी चाहिए। टाइल्स खपाने के लिए भी डूडा अविकसित और अवैध कालोनियों में सड़क आदि का काम करवाने में जुटा है।
भले ही नगर निगम को खुद को स्मार्ट सिटी की रेस में शामिल करने की होड़ में जुटा हो, मगर उसी से जुड़ा विभाग जिला नगरीय विकास प्राधिकरण (डूडा) शहर की सूरत बिगाड़ने में जुटा है।
मनमानी और अनियमितताओं का आलम यह है कि अवैध और अविकसित कालोनियों में लाखों रुपये के बजट खर्च कर नाली और सड़कें बनाई जा रही हैं। इस पूरे खेल में अफसरों के साथ सत्ताधारी सपा नेताओं की सांठगांठ हैं और निजी हितों के चलते कोई भी इस खेल को रोकने की जहमत नहीं उठा रहा है।
दरअसल, विकास प्राधिकरण की शह पर शहर में लगातार अवैध कालोनियां विकसित हो रही हैं। ऐसे में डूडा के अफसर भी इन कालोनाइजर के साथ मिलकर उसके विकसित होने से पहले ही वहां बड़े पैमाने पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगवाने से नहीं चूक रहे हैं। इस बड़े गोलमाल में ज्यादातर मंडी समिति रोड से जुड़ी कालोनियां हैं। सूत्रों की मानें तो मुस्लिम इलाकों की इन अवैध कालोनियों प्लाटिंग के बाद ही डूडा मनमाने तरीके से काम कर चुका है।
आपको बता दें कि सहारनपुर में ज्यादातर अवैध कालोनियां सपा नेताओं की शह पर कांटी जा रही है। ऐसे में सत्ताधारियों के दबाव में विकसित होने से पहले ही राजनीतिक दबाव में डूडा वहां काम करवा रहा है।
नियम कायदों की कमी से अफसर उठा रहे फायदा
नियमानुुसार डूडा के पास मलिन बस्तियों में काम करने का अधिकार है। इसी तर्क पर मुस्लिम इलाकों में विकसित हो रही अवैध और अविकसित कालोनियों में भी कालोनाइजर को फायदा पहुंचाने के लिए अफसर यह खेल कर रहे हैं। इससे पहले भी इसकी शिकायतें हो चुकी हैं, मगर सत्ताधारियों के संरक्षण के चलते इस गोलमाल पर रोक नहीं लग रही है।
अधिकारी कहिन
अविकसित और अवैध कालोनियों में डूडा की ओर से काम नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हुआ है या हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। इसमें अनियमितता पर कठोर कार्रवाई भी होगी।
- एमपी अग्रवाल, मंडलायुक्त