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कक्षाओं में उपस्थिति में शहर से आगे हैं देहात के बच्चे

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स्कूल से लौटती छात्रा। - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्कूलों को खुले 20 दिन से अधिक बीत चुके हैं। मगर शहरी क्षेत्र के स्कूलों में दोनों शिफ्टों में भी उपस्थिति 60 फीसदी से ऊपर नहीं जा पा रही है, जबकि देहात के स्कूलों में उपस्थिति 80 से 90 फीसदी हो रही है। यानी कहीं न कहीं शहरी क्षेत्र के अभिभावक कोरोना को लेकर अधिक आशंकित हैं।
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कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। ऐसे में ज्यादातर अभिभावक बच्चों की सेहत को लेकर अधिक सजग हैं। यही वजह है कि 20 दिन से अधिक होने के बाद भी शहर के ज्यादातर स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 30 फीसदी तक ही है। प्रोग्रेसिव स्कूल फोरम के सचिव एवं सहारनपुर पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य सुशीर जोशी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में अभिभावक थोड़ा घबराए हुए हैं, जो फिलहाल बच्चों को स्कूल भेजने की बजाय ऑनलाइन पढ़ाई कराना ठीक समझ रहे हैं। इसकी वजह से ज्यादातर स्कूलों में 30 फीसदी तक ही उपस्थिति है। कुछ स्कूल ऐसे हैं, जहां 50 या 60 फीसदी तक उपस्थिति है। इनमें ज्यादातर स्कूल शहर से बाहर ही के हैं। उधर, देहात के स्कूलों की बात करें तो विद्यार्थियों की उपस्थिति 90 फीसदी तक है। डीएवी पब्लिक स्कूल रसूलपुर शहर के बाहरी क्षेत्र में है। प्रधानाचार्य जगदीश सिंह ने बताया कि उनके यहां दो शिफ्टों में स्कूल चल रहा है। कुल पंजीकृत विद्यार्थियों के सापेक्ष 85 से 90 फीसदी है। चूंकि संख्या अधिक है ऐसे में कोविड के दिशा निर्देशों का पालन भी कड़ाई से किया जा रहा है।
जनपद में कोरोना की स्थिति
जनपद में 20 दिन से कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है। पूरे अगस्त और सितंबर माह में अभी तक मात्र पांच मरीज कोरोना के मिले हैं। कहीं न कहीं ये भी एक वजह है कि अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने की हिम्मत कर पा रहे हैं।
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विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़े अच्छी बात है। इससे भी अच्छी बात यह है कि जनपद में कोरोना का कोई एक्टिव मरीज नहीं है। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि स्कूल लापरवाही बरतें। शासन के निर्देश हैं कि स्कूलों में कोविड से बचाव के सभी नियमों का पालन किया जाए। सभी स्कूलों को इसका ध्यान रखना है।
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- रविदत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक।

स्कूल से लौटते छात्र- फोटो : SAHARANPUR

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