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UP: केंद्र सरकार पर जमकर बरसे मौलाना अरशद मदनी, कहा-नफरत के पत्थर पर टिकी है सत्ता की कुर्सी

Mon, 05 May 2025 12:01 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली स्थित मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस में केंद्र सरकार पर जमकर प्रहार किया।
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मौलाना अरशद मदनी।
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विस्तार
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली स्थित मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस में केंद्र सरकार पर जमकर प्रहार किया। देश के हालात को लेकर उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कहा कि सत्ता की कुर्सी जिस पत्थर पर टिकी है वह नफरत है। उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर भी सरकार को घेरते हुए सवालिया निशान खड़े किए।

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रविवार को मौलाना अरशद मदनी ने बेझिझक होकर सभी मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मौलाना मदनी ने भावुक स्वर में कहा कि हमने अपनी 85 साल की जिंदगी में देश में इतने खराब हालात पहले कभी नहीं देखे। आरोप लगाया कि सत्ता की कुर्सी जिस पत्थर पर टिकी है वह नफरत है। सरकार का केवल एक ही सिद्धांत है, नफरत फैलाओ लोगों को धर्म के आधार पर बांटो और सत्ता प्राप्त करो।

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कहा कि यह अफसोसनाक है कि सरकार ऐसा कोई काम नहीं करना चाहती जिससे देश की आम जनता को शांति और सुकून मिले, लोगों को रोजगार और नौकरी मिलें। मौलाना मदनी ने कहा कि आज देश के हालात देखकर हम ही नहीं बल्कि हमारे गैर-मुस्लिम भाई भी दुखी हैं।

हर मुद्दे को धर्म से जोड़कर नफरत फैलाना आज राजनीति का हिस्सा बन गया है। पहलगाम आतंकी हमले पर मदनी ने कहा कि किसी भी निर्दोष की हत्या बहुत बड़ा पाप है, जो लोग ऐसा करते हैं वे इंसान नहीं हो सकते।
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आतंकियों के घरों पर बुलडोजर चलाने पर कहा कि अगर केवल शक के आधार पर किसी निर्दोष के घर को मलबे में बदल दिया गया है, तो कोई भी न्यायप्रिय व्यक्ति इसे सही नहीं ठहरा सकता। सवाल उठाया कि एक ऐसे पर्यटन स्थल पर जहां उस दिन तीन हजार से अधिक सैलानी मौजूद थे, कोई सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी। जब हर चप्पे पर सेना और बीएसएफ तैनात है तो आतंकी वहां तक कैसे पहुंच गए।

मौलाना मदनी ने कहा कि यह भी चिंता की बात है कि हमले के डेढ़ घंटे बाद तक भी पुलिस या सेना वहां नहीं पहुंची। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर घायलों की मदद की और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने वक्फ कानून में किए गए संशोधनों पर कहा कि हम इसे धर्म में हस्तक्षेप मानते हैं। जिन प्रावधानों को हटाया गया है, उससे स्पष्ट होता है कि सरकार हमारे वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है।
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