सहारनपुर। अक्सर किसी न किसी मामले को लेकर सुर्खियों में रहने वाला नगर निगम एक बार फिर चर्चाओं में है। ताजा मामला करीबी फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए 17.65 करोड़ रुपये के कार्यों के टेंडर की शर्तें बदलने का है। इसमें संबंधित अधिकारी द्वारा समिति सदस्यों को गुमराह किया गया। मामला पकड़ में आने के बाद नगर आयुक्त शिपू गिरि ने जांच बिठा दी है।
दरअसल, मल्हीपुर रोड स्थित एसटीपी के पास और मातागढ़ स्थित जल कंपाउंड के अंदर स्टेटिक ट्रांसफर स्टेशन स्थापित किए जाने हैं। इनकी लागत करीब 17 करोड़ 65 लाख 82 हजार रुपये आएगी। नगर निगम के गैराज अनुभाग द्वारा टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई। टेंडर की फाइल निविदा वेटिंग समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई। कई पेज की फाइल को समिति सदस्यों द्वारा ठीक से पढ़ा गया। इसके बाद उनके हस्ताक्षर होने थे। निगम सूत्रों ने बताया कि उस समय यह कहते हुए समिति के हस्ताक्षर नहीं कराए गए कि प्रिंट गलत निकला है। दूसरा प्रिंट निकाला जाएगा। आरोप है कि दूसरा प्रिंट निकालने के नाम पर टेंडर की शर्तें बदल दी गई। शर्तें वही लगाई गई, जो मात्र एक फर्म पूरा कर रही हो।
इसके बाद जब फाइल समिति के पास पहुंची तो समिति ने यह सोचकर बिना पढ़े हस्ताक्षर कर दिए कि फाइल पहले पढ़ी हुई है। इसके बाद टेंडर पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए। वहां मामला पकड़ में आया। मामले में नगर आयुक्त शिपू गिरि ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। टेंडर में विभिन्न अनियमितताएं होने की आशंका जताते हुए तीन सदस्यों की जांच समिति गठित की है। समिति को 29 मई तक आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है।
समिति में यह लोग शामिल
जांच समिति में अपर नगर आयुक्त प्रथम प्रदीप कुमार यादव, महाप्रबंधक जलकल पुरुषोत्तम कुमार, लेखाधिकारी मनोज त्रिपाठी शामिल हैं। समिति में शामिल महाप्रबंधक जलकल खुद मौजूदा गैराज प्रभारी हैं। इसके अलावा अपर नगर आयुक्त और लेखाधिकारी निविदा वेटिंग समिति में शामिल हैं, जिनके हस्ताक्षर टेंडर पर हैं। ऐसे में जांच में पारदर्शिता बरती जाएगी। यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
महाराष्ट्र की फर्म से चल रही सेटिंग
बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारी काम का ठेका महाराष्ट्र की फर्म को देने के इच्छुक हैं। फर्म के लोग कई दिन से नगर निगम के चक्कर लगा रहे थे। उनसे बात होने के बाद ही टेंडर की शर्तें बदली गई।