उन्होंने महिलाओं से भी समाज को एकजुट करने की मुहिम में आगे आने की अपील की। स्वामी दीपांकर ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में शोभायात्राओं और धार्मिक आयोजनों पर हो रही घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज को एक मंच पर आना ही होगा।
मंच पर ग्रंथी देवेंद्र सिंह, वीरेंद्र शास्त्री, बीके संतोष, साध्वी शरण दास, महंत लक्ष्मी चंद, योगानंद, विभाग प्रचारक आशुतोष, जिला कार्यवाह मनीष सहित अनेक संत व पदाधिकारी विराजमान रहे। सभी वक्ताओं ने हिंदू समाज से जातियों से ऊपर उठकर एकजुट होने और सामाजिक समरसता को अपनाने की अपील की। संचालन डा. अमित गर्ग और गगन गर्ग ने संयुक्त रूप से किया। समिति के रमेश चंद गर्ग, विकास मित्तल, मा. यशपाल सैनी, मनोज गोयल, शशिकांत शर्मा, विजय पाल, राजेश काका, सतकुमार, दीपक सैनी, राकेश मित्तल, देवेंद्र प्रधान सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
सम्मेलन में उठा यूजीसी का मुद्दा
सम्मेलन के दौरान उस समय विशेष स्थिति उत्पन्न हो गई, जब स्वामी दीपांकर जी महाराज के प्रवचन के बीच एक महिला राजनंदिनी ने खड़े होकर यूजीसी से जुड़े मुद्दे को उठा दिया। महिला ने कहा कि जहां एक ओर जातिवाद समाप्त कर हिंदुओं को एकजुट होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर यूजीसी के माध्यम से स्वर्ण समाज के बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है।
इस पर स्वामी दीपांकर जी महाराज मंच से उतरकर महिला के पास पहुंचे और कहा कि यदि किसी भी नीति या व्यवस्था से हिंदू समाज की एकजुटता को खतरा उत्पन्न होता है, तो सरकार निश्चित रूप से इस विषय पर ध्यान देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यूजीसी की खामियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि समाज के किसी भी वर्ग के भविष्य के साथ अन्याय न हो।