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दस वर्षों में 381 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बढी गन्ने की उत्पादकता

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सहारनपुर। जनपद में किए गन्ना बीज एवं प्रजाति में बदलाव तथा बुआई की ट्रेंच विधि किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। इसके चलते दस वर्षों में जनपद में गन्ने की उत्पादकता में 381 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।
जनपद में गन्ना फसल को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ी है। वर्ष 2012-13 में जनपद में गन्ने की उत्पादकता 570.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी। वह 2021-22 में बढ़कर 951.72 क्विंटल हो गई। इसके पीछे गन्ने की नई प्रजातियों खासतौर पर कोशा -0238 का अहम योगदान है। इसके अतिरिक्त बुआई की ट्रेंच विधि और शरदकालीन गन्ने की अधिक बुआई से भी उत्पादकता बढ़ाने में योगदान दिया है।
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जनपद में गन्ना क्षेत्रफल के 98 प्रतिशत गन्ना कोशा- 0238 प्रजाति का है। हालांकि अब किसानों ने कुछ नई किस्मों की बुआई का क्षेत्रफल बढ़ाया है। इनमें कोशा-13235, को-15023, को-0118 और कोलक-14201 आदि उन्नतशील प्रजातियां शामिल हैं।
बोले किसान
गन्ना बुआई की ट्रेच विधि और गन्ने की कोशा- 0238 जैसे उन्नतशील प्रजाति ने जनपद में गन्ने की उत्पादकता को बढ़ाने में महत्पूर्ण योगदान है। इसके अतिरिक्त किसान भी गन्ने की खेती के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं। समय से रोगों एवं कीटों का प्रबंधन और नई तकनीक का प्रयोग होने से जनपद में गन्ने की उत्पादकता बढ़ी है।-पदमश्री सेठपाल सिंह, प्रगतिशील किसान ग्राम नंदी
किसानों की मेहनत रंग लाई
गन्ने की उत्पादकता बढाने में किसानों की कडी मेहनत का बडा योगदान है। इसके अलावा उन्नतशील प्रजातियों की बुआई का रकबा बढने और समय पर कीटनाशकों और पौषक तत्वों का उपयोग करने से भी गन्ने की उत्पादकता बढी है। असौजी गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ने का भी उत्पादकता बढ़ाने में खासी भूमिका है।-मदन सिंह, प्रगतिशील किसान, गांव महेशपुर
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वर्जन
गन्ना विभाग लगातार किसानों को उन्नतशील प्रजातियां और नई तकनीकी का प्रयोग करने के लिए जागरूक करता है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को गन्ने की उत्तम खेती करने के लिए न सिर्फ टिप्स देते हैं बल्कि प्रेरित भी करते हैं। इसके चलते दस वर्षो में जनपद में गन्ने की उत्पादकता में 381 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की वृद्घि हुई है। -- डॉक्टर आरडी द्विवेदी, जिला गन्ना अधिकारी।
जनपद में गन्ने की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर
वर्ष उत्पादकता
2012-13 570.16 क्विंटल
2013-14 622.88 क्विंटल
2014- 15 618.00 क्विंटल
2015- 16 658.56 क्विंटल
2016 -17 667.48 क्विंटल
2017 - 18 701.92 क्विंटल
2018 - 19 732.36 क्विंटल
2019 - 20 774.68 क्विंटल
2020 - 21 832.90 क्विंटल
2021 - 22 951.72 क्विंटल
नोट: गन्ना विभाग के आंकडों के अनुसार
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