गन्ने में मिठास कम, चीनी मिलाकर बनाया जा रहा गुड़
बड़गांव/सहारनपुर। कोल्हुओं पर गुड़ बनना शुरू हो गया है, लेकिन अभी अपरिपक्व (कच्चे) गन्ने में मिठास नहीं है। इस कारण कोल्हू संचालक गुड़ बनाने में चीनी का प्रयोग कर रहे हैं। इससे गुड़ बनाने की लागत तो बढ़ रही है, लेकिन बाजार में गुड़ का दाम अच्छा मिलने से लाभ भी हो रहा है।
जिले में हर साल 250 से ज्यादा कोल्हू संचालित होते हैं। शुरुआती सीजन में कोल्हुओं पर गुड़ बनना शुरू हो गया है। ज्यादा कमाई के फेर में कोल्हू संचालक शुगर मिल चलने से पहले ही गन्ना खरीदना शुरू कर देते हैं। बड़गांव से लेकर महेशपुर तक मात्र तीन किलोमीटर के क्षेत्र में ही करीब 25 कोल्हू हर वर्ष संचालित होते हैं। कोल्हू शुरू होते ही जरूरतमंद किसान अपने गन्ने को परिपक्व होने से पहले ही औने-पौने दाम में डालना शुरू कर देते हैं। समय से पहले काटे गए गन्ने में रिकवरी (गुड़/चीनी) कम है। तमाम कोशिशों के बाद भी बिना चीनी डाले गुड़ के लिए चाशनी तैयार नहीं हो पाती है।
कोल्हू संचालक लालसिंह, सुखबीर, गोपी, अरविन्द, कुलदीप, देवेन्द्र आदि बताते है कि गुड़ के लिए अच्छी रिकवरी लाने के लिए अभी चीनी का इस्तेमाल किया जा रहा हैं। एक क्विंटल चाशनी में पांच से छह किलोग्राम चीनी का प्रयोग कर रहे हैं। चाशनी में चीनी मिलाकर बनाए जा रहे गुड़ को कोल्हू संचालक स्वाद में बेहतर और कुरकुरा (कणदार) बताते हैं।
कई राज्यों में होती है गुड़ की सप्लाई
एक तो गुड़ का दाम चीनी से ज्यादा है और चीनी मिलें नहीं चलने पर मजबूर किसान कोल्हू संचालकों को गन्ना कम रेट (230-250 रुपये क्विंटल) पर विक्रय कर देते हैं। गन्ने और सस्ती चीनी से ज्यादा से ज्यादा गुड़ तैयार करके मोटा मुनाफा कमाते हैं। कोल्हू संचालकों के अनुसार यहां से दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तक गुड़ की सप्लाई होती है। मंडियों में गुड़ की कीमत थोक में जहां 3000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही है। वहीं फुटकर में खुरपापाड़ 45 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। जबकि चीनी का दाम 32 से 35 रुपये प्रति किलो है।
चिमनी लगाने का नहीं हो रहा पालन
प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नए मानक तय किए, जिनके अनुसार कोल्हुओं पर भी चिमनी लगाई जानी है तथा आबादी से 500 मीटर की दूरी पर ही कोल्हू लगाया जा सकता है। अब कोल्हुओं का संचालन शुरू हो गया है, लेकिन चिमनी लगाने के नियम का पालन नहीं हो रहा है।
कोल्हुओं के लिए नई गाइडलाइन
- दस मीटर ऊंचाई पर लगानी होगी चिमनी
- आबादी से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर लग सकेगा कोल्हू
- भट्ठियों से वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए समुचित व्यवस्था करनी होगी
- कोल्हू संचालन में प्रतिबंधित ईंधन का प्रयोग नहीं होगा
- ईंधन के रूप में पॉलिथीन जलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी
- मानकों के उल्लंघन पर बंदी और पर्यावरण क्षतिपूर्ति की कार्रवाई होगी
टीम भेजकर सर्वे कराया जाएगा। प्रतिबंधित ईंधन का कोल्हू पर प्रयोग नहीं होने दिया जाएगा। चिमनी लगाने सहित अन्य गाइडलाइन का भी पालन कराया जाएगा।
- एसआर मौर्य, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी