महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह का कहना है कि एक तरफ बच्ची की उम्र कम है तो दूसरी तरफ गर्भ को ज्यादा समय हो चुका है। ऐसे में गर्भपात कराना खतरे से खाली नहीं है।
इसके अलावा गर्भपात कराने के लिए अदालत की अनुमति जरूरी है। प्राथमिक तौर पर ऐसी स्थिति में प्रसव ही कराया जाता है, लेकिन इसमें बच्ची में शारीरिक दिक्कतों के अलावा मानसिक तौर पर भी मजबूत होना होगा।
ये है पूरा मामला
थाना क्षेत्र के गांव निवासी किशोरी(13) कक्षा सात में पढ़ रही है। छात्रा के पिता का निधन 22 जनवरी को हो गया था। 25 जनवरी की देर शाम छात्रा अपने घेर में जा रही थी। रास्ते में पड़ोस में रहने वाले एक किशोर ने उसे पकड़ लिया और पास की एक सुनसान जगह पर ले जाकर दुष्कर्म किया। किशोर ने छात्रा को धमकी दी कि यदि किसी को कुछ बताया तो वह उसे जान से मार देगा। इस कारण छात्रा ने परिवार से कुछ नहीं बताया।
दो दिन पहले किशोरी की तबीयत खराब हो गई। उसे उल्टी एवं बुखार हुआ, तो छात्रा की मां ने अपनी ननद को बताया। ननद के साथ बेटी को किसी डॉक्टर के पास दिखाने के लिए ले गई। महिला डॉक्टर ने बताया कि किशोरी छह महीने की गर्भवती है। यह सुनकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जब महिला ने अपनी बेटी से हकीकत पूछी तो उसने पूरा घटनाक्रम बता दिया। महिला ने अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म के आरोपी किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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