श्री शाकंभरी देवी सिद्धपीठ में शारदीय नवरात्र मेला मंगलवार से प्रारंभ हो रहा है। जिला पंचायत द्वारा मेले की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई है। पुलिस प्रशासन ने भी मेले की सुरक्षा का पूरा खाका तैयार कर लिया है। बाबा भूरादेव मंदिर से लेकर शाकंभरी देवी मंदिर तक करीब एक किमी लंबे मेला परिसर की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहेंगे। इसके अलावा मेला परिसर तीसरी आंख की नजर में भी रहेगा। इसके लिए मेला परिसर में सीसी टीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिसका कंट्रोल मेला कोतवाली में बनाया गया है।
सहारनपुर जनपद की शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में मंगलवार से शुरू हो रहा शारदीय नवरात्र मेला वर्ष में लगने वाला सबसे बड़ा मेला है। इस मेले तमाम व्यवस्थाएं जिला पंचायत द्वारा की जाती है। गत वर्षों में देवी दर्शनों के लिए आने वाले माता के भक्तों की भीड़ में बढ़ोतरी के अनुमान को भांपते हुए इस साल जिला पंचायत ने व्यवस्थाओं में भी विस्तार किया गया है।
अनुमानित भीड़ को देखते हुए इस बार बेरिकेडिंग को और अधिक लंबाई तक बनाया गया है। बेरिकेडिंग के ऊपर से रास्ता बनाने के लिए पांच अस्थाई लकड़ी के पुल और एक बड़ा लोहे का पुल बनाया गया है, ताकि आवागमन में परेशानी न हो। इसके अलावा 200 से अधिक अस्थाई शौचालय, पेयजल के लिए पाइन बिछाकर करीब 110 टोटियां मेला परिसर में लगाई गई है। मेला परिसर में रात के समय प्रकाश की व्यवस्था के लिए बिजली की अस्थाई लाइनें खींची गई है और उन पर हाई मास्क लाइटें लगाई गई है। माता के भक्तों के लिए रात में ठहरने की व्यवस्था रैन बसेरा में की गई है। रैन बसेरा को भक्तों के लिए खोल दिया गया है।
यह रहेगी मेले की सुरक्षा
बेहट। मेले की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए है। 100 कांस्टेबल, 10 हैड कांस्टेबल, 39 महिला कांस्टेबल, 15 एसआई, एक प्लाटून पीएसी, चार एपी गारद, पीयर गेस्ट स्वायर्ड, फायर बिग्रेड और मेला कोतवाली इंचार्ज मेले की सुरक्षा में रहेंगे। एसओ मिर्जापुर देवेंद्र यादव ने बताया कि मेला परिसर में पांच वाच टावर लगाए जा रहे हैं, जिनसे सुरक्षाकर्मी पूरे मेले पर नजर रखेंगे। सीसी टीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।
सिद्धपीठ दर्शन से होती है आनंद की प्राप्ति
बेहट। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ कई ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी रहे विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में पावन नवरात्र एवं प्रत्येक मास के चतुर्दशी पर्व पर अटूट आस्था, श्रद्धा एवं भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। पावन त्रिवेणी में गोते लगाने वाले भक्तों की धारणा है कि इस सिद्धपीठ में शीश नवाने से प्राणी सर्व सुख संपन्न हो जाता है।
वन आच्छादित पावन तीर्थ के निकटवर्ती क्षेत्र में बाबा भूरादेव मंदिर, छिन्नमस्ता मंदिर, रक्तदंतिका मंदिर, पंच महादेव, बड़केश्वर महादेव, इंद्रेश्वर महादेव, साकेश्वर महादेव, कलमेश्वर महादेव, बटुकेश्वर महादेव, सहंश्रा ठाकुर धाम, वीर खेत, प्राचीन गुफा, ठाकुर सहंस्त्र भगवान विष्णु की विराट छवि, सूर्य कुंड, गौतम ऋषि की गुफा, बाण गंगा, तथा प्रेत शिला सरीखे पवित्र स्थल स्थापित है।
इस सिद्धपीठ में बने माता के पावन भवन में माता शाकंभरी देवी भीमा, भ्राम्बरी और शताक्षी देवी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित है। मान्यता है कि पुरातन युग में जब राक्षसों के घोर पाप के कारण सृष्टि पर अकाल पड़ गया था ठीक उसी समय सभी देवताओं ने मिलकर शिवालिक पर्वत श्रृंखला की प्रथम शिला पर पूर्ण भक्ति भावना, आस्था एवं श्रद्धा से ओतप्रोत होकर मां जगदंबा की आराधना की थी। इससे प्रसन्न होकर अतत: मां भगवती प्रकट हुई और उन्होंने अपनी माया का चमत्कार दिखाते हुए अकाल ग्रस्त पृथ्वी लोक में भूख और प्यास के प्रकोप को दूर कर दिया था। इसी तरह माता ने अपनी शक्ति के बल पर सभी प्राणियों की रक्षा की और संसार में मां शाकंभरी देवी के नाम से सभी के लिए पूजनीय बनी।
पुरातन ग्रंथों में माता की महिमा का उल्लेख असुरों से युद्ध में शुम्भ, निशुंभ, महिषासुर, चंड, मुंड एवं महा असुर रक्तबीज का संहार करने के लिए भी किया गया है। माता ने धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले भूरा को वचन दिया था कि जो उनके दरबार में आएगा वह सबसे पहले भूरादेव के दर्शन करेगा। यहीं कारण है सिद्धपीठ भवन से एक किमी पहले स्थित बाबा भूरादेव के मंदिर का दर्शन के उपरांत ही श्रद्धालु आगे बढ़ते हैं।