सहारनपुर। नगर निगम की बाहरी कॉलोनियां, जिनमें 32 गांव भी शामिल हैं, उनमें सड़क, सीवर और बिजली खासकर पथ प्रकाश की सुविधा देना निगम की जिम्मेदारी है। अमर उजाला ने बाहरी कॉलोनियों में इन सुविधाओं की स्थिति की पड़ताल की। सड़क और पथ प्रकाश की व्यवस्था ज्यादातर जगहों पर ठीक है, मगर सीवर की सुविधा नगर निगम 11 साल में भी नहीं पहुंचा सका है। अमृत योजना के तहत जो सीवर लाइन डाली जा रही है वह भी निगम बनने से पहले के ही शहर में डाली जा रही है।
32 गांव पूरी तरह अछूते
वर्ष 2010 में नगर निगम के गठन के दौरान 32 गांवों को शहर में शामिल किया गया था। इनके अलावा बीते 11 साल में अनगिनत कॉलोनियां भी काटी जा चुकी हैं, जिनमें वैध और अवैध कॉलोनी सब शामिल हैं। निगम ने नियम बनाया है कि, जिन कॉलोनियों में 50 फीसदी तक आबादी बस चुकी है वहीं पर सुविधाएं दी जाएंगी, लेकिन कई कॉलोनियां पूरी बसने के बाद भी सीवर जैसी सुविधाओं से खाली हैं। 32 गांव पूरी तरह अछूते हैं।
इन योजनाओं का भी नहीं मिला लाभ
केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत 59 किलोमीटर की सीवर लाइन डाली गई है और कुछ जगहों पर अब भी डल रही है। इसका बजट करीब 82 करोड़ रुपये का है। इसमें दिल्ली रोड की मिशन कंपाउंड, चंद्रनगर, आवास विकास, हकीकतनगर समेत कई कॉलोनियों को लिया गया है। यानी बाहरी कॉलोनियां इसमें शामिल नहीं हैं। इसके अलावा स्मार्ट सिटी योजना के तहत चिह्नित किए गए एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलेपमेंट) क्षेत्र में निगम के पुराने 21 वार्ड शामिल हैं। यानी नई कॉलोनी या गांव नहीं हैं। इनमें करीब 100 किलोमीटर की सीवर लाइन डाली जानी है, जिसका बजट करीब 91.14 करोड़ रुपये का है।
सड़कों की स्थिति सामान्य
बाहरी कॉलोनियों में मुख्य मार्ग दुरुस्त हैं, मगर गलियां आज भी कच्ची या टूटी हुई हैं। कच्ची गलियां उन कॉलोनियों की हैं, जो पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं। निगम भी कम से कम 50 फीसदी विकसित कॉलोनियों ही में सुविधाएं देता है। इसके अलावा 32 गांवों की सड़कें सामान्य हैं, जिनमें कई को मरम्मत की जरूरत है।
80 फीसदी क्षेत्र में पथ प्रकाश
नगर निगम ने बीते तीन साल में पथ प्रकाश व्यवस्था पर काम किया है। शहर से पुरानी पीली लाइटें उतारकर एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। शहर की बाहरी कॉलोनियों और 32 गांवों में भी एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। इनके अलावा प्रत्येक गांव में एक हाईमास्ट लाइट लगाई गई है, जिस पर भी एलईडी लगी हैं।
शहर में शामिल 32 गांवों में बुनियादी सुविधाएं जैसे पथ प्रकाश, सड़क, नाली, सफाई की सुविधा कई साल से दी जा रही है। सामुदायिक एवं सार्वजनिक शौचालयों के साथ ही व्यक्तिगत शौचालय भी दिए गए हैं, जिसकी वजह से सभी गांव ओडीएफ बने हैं। इनके सर्वांगीण विकास के लिए योजना बनाई जा रही है।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।