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निस्वार्थ सेवा ही स्वामी विवेकानंद का आदर्श

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नि:स्वार्थ सेवा ही स्वामी विवेकानंद का आदर्श: कालेंद्रानंद
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सहारनपुर। शहर के राधा विहार स्थित महाशक्ति पीठ वैष्णवी महाकाली मंदिर में स्वामी विवेकानंद जन्मशती के उपलक्ष्य में असहायों को रजाई वितरण किया गया। इस दौरान स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा ही स्वामी विवेकानंद का आदर्श है।
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शनिवार को कार्यक्रम के शुभारंभ पर स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का विधिवत पूजन और माल्यार्पण किया गया। श्री रामकृष्ण विवेकानंद संस्थान के सेवकों ने 108 असहायों को रजाई बांटी। प्रवचन के दौरान स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा कि सेवा कर्म ही सबसे बड़ी पूजा है। स्वामी विवेकानंद का संपूर्ण जीवन सदगुरुदेव के चरणों में नि:स्वार्थ समर्पित था। उन्होंने शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में अपने सार्वभौमिक उद्बोधन में भारतीय संस्कृति को विश्व धर्मगुरु स्तर पर स्थापित किया। इस दौरान अरुण स्वामी, राजेंद्र धीमान, सुरेश गुप्ता, मनीष गुप्ता, मांगेराम, नरेश चंदेल, रमेश शर्मा, नवीन सैनी, पंडित नीरज मिश्रा, आचार्य अजित शर्मा, अजब सिंह चौहान, चेतन सैनी और सुरेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।
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