सहारनपुर। कई स्कूल संचालक मासूमों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर रहे हैं। पात्र होने के बावजूद स्कूलों से बच्चों और अभिभावकों को अपमानित कर लौटाया जा रहा है। इससे अभिभावकों के साथ ही मासूम भी मानसिक उत्पीड़न महसूस कर रहे हैं। खास बात यह है कि विभागीय अधिकारियों और जिला प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी बच्चों को दाखिला नहीं मिल रहा है।
ताजा मामला मेहंदी सराय का है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत चयनित बच्ची अजमीना शीरीन के पिता मोहम्मद ताहिर ने जिलाधिकारी से स्कूल की शिकायत की है। ताहिर ने बताया कि उनकी बेटी अजमीना को चिलकाना रोड स्थित एक स्कूल में कक्षा दो में प्रवेश के लिए भेजा गया था। कई बार स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए वह बच्ची को लेकर पहुंच चुके हैं, लेकिन स्कूल संचालकों का कहना है कि फीस जमा करानी होगी। पीड़ित ने स्कूल संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई करने, उनकी बेटी को प्रवेश दिलाने की मांग की है। इससे पहले एक सब्जी विक्रेता ने एक स्कूल संचालक पर उनकी बेटी को प्रवेश नहीं देने का आरोप लगाया था। बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक से शिकायत की, लेकिन स्कूल ने प्रवेश नहीं दिया। आरटीई की प्रवेश प्रक्रिया के पहले चरण में 180 पात्र बच्चे ऐसे रहे हैं, जिनको स्कूलों ने प्रवेश नहीं दिया है। स्कूल सीटें फुल होने का बहाना बनाकर बच्चों को लौटा रहे हैं।
जिला समन्वयक कृपाल मलिक ने बताया कि यदि कोई स्कूल प्रवेश देने में आनाकानी कर रहा है तो उसको पत्र लिखा जा रहा है। यदि सीटें फुल हैं तो अन्य किसी स्कूल में प्रवेश दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।