तकनीक के इस दौर में भी अंधविश्वास कितना हावी है, इसकी बानगी बृहस्पतिवार को गंगोह के बल्लामजरा गांव में दिखाई दी। गांव निवासी उस्मान (43) हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। ग्रामीण उसे करीब 10 किमी दूर अस्पताल लेकर जाने की बजाय 15 मिनट तक उसके शरीर पर गोबर का लेप करते रहे, लेकिन जान नहीं बच सकी। पिछले दो दिनों में इस तरह का यह दूसरा मामला है।
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बल्लामजरा निवासी उस्मान के मकान पर बृहस्पतिवार सुबह से बिजली नहीं थी। वह यह देखने के लिए ट्रांसफार्मर के पास पहुंचा कि तार में कोई समस्या तो नहीं है, तभी वह हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। करंट लगते ही वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा। घटना के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
इसी बीच कुछ लोगों ने कहा कि शरीर पर गोबर का लेप लगाने से यह ठीक हो सकता है। इसके बाद ग्रामीणों ने उस्मान के शरीर पर गोबर का लेप लगाना शुरू कर दिया। करीब 15 मिनट तक शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। तब आनन-फानन में करीब 10 किलोमीटर दूर सीएचसी पर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद परिजनों ने शव को गांव में ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक कर दिया। मृतक उस्मान चार भाइयों और दो बहनों में तीसरे नंबर का था। उसके तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। वह खेती और मेहनत-मजदूरी के सहारे परिवार का पालन-पोषण करता था। बता दें, कि बुधवार को भी गांव सांगाठेडा में एक युवक की हाईटेंशन लाइन का करंट लगने से मौत हो गई थी। उसके शव को रेत दबाकर जिंदा करने का प्रयास किया गया था।
कई बार कर चुके शिकायत
ग्राम प्रधान उस्मान ने बताया कि गांव में जर्जर तारों और खराब ट्रांसफार्मर की शिकायत कई बार विद्युत निगम से की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ट्रांसफार्मर खुले में रखे हुए हैं। उन्होंने विद्युत निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं, जेई राजकिशोर ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
ये बोले डीएम
यह कोरा अंधविश्वास है। आम जनता से अपील है कि ऐसा बिल्कुल भी न करें। किसी भी आपात स्थिति में अंधविश्वास की बजाय व्यक्ति को डॉक्टर के पास लेकर जाएं, जिससे जान बचाई जा सके। - मनीष बंसल, जिलाधिकारी
सीएमओ ने ये कहा
इस तरह अंधविश्वास में आकर जान नहीं बचाई जा सकती। जितने समय में गोबर का लेप किया गया, अगर उस अवधि में डॉक्टर के पास लेकर जाते तो शायद जान बच सकती थी। गोबर का लेप करने से झुलसे हुए व्यक्ति को संक्रमण का भी खतरा रहता है। ऐसा न करें और समय पर उपचार कराएं। - डॉ. प्रवीण कुमार, सीएमओ