सहारनपुर में जिला कारागार में बंद कैदी की बीमारी के चलते मौत हो गई। परिजनों ने मृतक के पुत्रों को पिता के अंतिम संस्कार के लिए पेरोल पर छोड़ने की मांग करते हुए देहरादून रोड पर जाम लगाकर हंगामा किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को शांत कराकर जाम खुलवाया। इसके बाद मृतक के पुत्रों को पेरोल पर छोड़ा गया, जिसके बाद परिजन चले गए।
थाना फतेहपुर गांव रामखेड़ी निवासी नोरतू (62) पुत्र संता जिला कारागार में बंद था। पुलिस के मुताबिक गांव के ही एक परिवार ने 2011 में लड़की भगाने के आरोप में नोरतू और उसके परिवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने नोरतू, उसकी पत्नी श्यामो, पुत्र राजू व रोशन और भतीजे प्रदीप को जेल भेजा था। इसके बाद यह लोग जमानत पर छूट गए थे। मामला न्यायालय में विचाराधीन था। ढाई वर्ष पूर्व न्यायालय ने सभी आरोपियों का दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। तभी से नोरतू, उसकी पत्नी, दोनों पुत्र और भतीजा जेल में बंद हैं। नोरतू टीबी की बीमारी से पीड़ित था। सोमवार को उसकी हालत बिगड़ गई थी। जेल प्रशासन ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। हालत गंभीर होने पर चिकित्सक ने हायर सेंटर रेफर किया गया था।
सोमवार को ही मेरठ के एक अस्पताल में नोरतू की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिवार की सदस्य प्रियंका, ग्रामीण शीशपाल, विरेंद्र राजेश ने बताया कि नोरतू के अंतिम संस्कार के लिए उसके पुत्र रोशन व राजू को पेरोल पर छोड़ने को प्रार्थना पत्र दिया गया था, जो मंजूर हो गया, लेकिन मंगलवार की देर शाम तक दोनों को जिला कारागार से नहीं छोड़ा गया। वह दोपहर से कारागार के बाहर इंतजार करते रहे। इसी से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने देहरादून रोड स्थित जेल चुंगी चौक पर जिला कारागार के सामने सड़क पर शव रख कर मंगलवार देर शाम जाम लगा दिया।
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