चुनाव जीतने के कुछ दिनों बाद ही बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से लखनऊ में मुलाकात को इससे जोड़कर देखा गया था। वही मुलाकात कर लौटने पर चेयरपर्सन ने अपने समर्थकों की नब्ज को टटोलते हुए मायावती से मुलाकात को व्यक्तिगत बताया था।
भाजपा में शामिल होने पर चेयरपर्सन रुमाना खान व पूर्व चेयरमैन अफजाल खान ने कहा कि भाजपा में सभी वर्गों का सम्मान है। नगर के विकास व क्षेत्र की जनता के कार्यों तथा पार्टी में बढ़ती मुस्लिमों की भागीदारी को देखते हुए वह भाजपा में शामिल हुए हैं।
उनके साथ सभासद शाहिद खान उर्फ कालू, आमना सादिक सैफी, मौ फराज सिद्दीकी शब्बू, पूर्व सभासद अफजल खान, पूर्व उप ब्लाक प्रमुख शमशेर खान, सलमान मलिक, अनीश कुरैशी आदि बड़ी संख्या में समर्थकाें ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
कुछ ऐसा है राजनीतिक सफर
पूर्व चेयरमैन अफजाल खान वर्ष 2006 में सबसे पहले नगर पंचायत के सभासद बने थे। इसके बाद उन्होंने बसपा ज्वाइन की। फिर बसपा को छोड़ अफजाल खान कांग्रेस के बैनर तले 2012 का चुनाव लड़ चेयरमैन बने। 2017 के निकाय चुनाव में कांग्रेस से लड़ते हुए हार गए और कांग्रेस को अलविदा कर जून 2022 में सपा का दामन थाम लिया। निकाय चुनाव में सपा से टिकट कटने की आशंका पर उन्होंने बसपा में घर वापसी की, लेकिन निकाय चुनाव में बसपा से भी टिकट नहीं मिलने पर पत्नी को निर्दलीय ही चुनाव में उतारा और जीत दर्ज की।