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Saharanpur: नानौता नगर पंचायत चेयरपर्सन रुमाना खान भाजपा में शामिल, पढ़ें-कैसा रहा है राजनीतिक सफर

Wed, 07 Feb 2024 08:22 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

सहारनपुर से नानौता नगर पंचायत चेयरपर्सन रुमाना खान ने भाजपा का दामन थाम लिया है। उन्होंने लखनऊ में पति पूर्व चेयरमैन अफजाल खान के साथ  भाजपा ज्वाइन की। तीन सभासद समेत कई समर्थक भी भाजपा में शामिल हुए। 
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रुमाना खान - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पिछले माह से चल रही चर्चाओं के बाद सहारनपुर से नगर पंचायत चेयरपर्सन रुमाना खान (निर्दलीय) और उनके पति पूर्व चेयरमैन अफजाल खान ने तीन सभासदों व साथियों सहित बुधवार को भाजपा का दामन थाम लिया। लखनऊ पार्टी मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली।

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नगर पंचायत नानौता की चेयरपर्सन रुमाना खान ने गत निकाय चुनाव में अपनी प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी निशात फात्मा को पटखनी देते हुए बड़े रोमांचक मुकाबले में जीत हासिल की थी। तभी से निर्दलीय चेयरपर्सन रुमाना खान व उनके पति के किसी पार्टी के दामन थामने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में हो रही थी।

चुनाव जीतने के कुछ दिनों बाद ही बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से लखनऊ में मुलाकात को इससे जोड़कर देखा गया था। वही मुलाकात कर लौटने पर चेयरपर्सन ने अपने समर्थकों की नब्ज को टटोलते हुए मायावती से मुलाकात को व्यक्तिगत बताया था।

भाजपा में शामिल होने पर चेयरपर्सन रुमाना खान व पूर्व चेयरमैन अफजाल खान ने कहा कि भाजपा में सभी वर्गों का सम्मान है। नगर के विकास व क्षेत्र की जनता के कार्यों तथा पार्टी में बढ़ती मुस्लिमों की भागीदारी को देखते हुए वह भाजपा में शामिल हुए हैं।
 
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उनके साथ सभासद शाहिद खान उर्फ कालू, आमना सादिक सैफी, मौ फराज सिद्दीकी शब्बू, पूर्व सभासद अफजल खान, पूर्व उप ब्लाक प्रमुख शमशेर खान, सलमान मलिक, अनीश कुरैशी आदि बड़ी संख्या में समर्थकाें ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
 
कुछ ऐसा है राजनीतिक सफर
पूर्व चेयरमैन अफजाल खान वर्ष 2006 में सबसे पहले नगर पंचायत के सभासद बने थे। इसके बाद उन्होंने बसपा ज्वाइन की। फिर बसपा को छोड़ अफजाल खान कांग्रेस के बैनर तले 2012 का चुनाव लड़ चेयरमैन बने। 2017 के निकाय चुनाव में कांग्रेस से लड़ते हुए हार गए और कांग्रेस को अलविदा कर जून 2022 में सपा का दामन थाम लिया। निकाय चुनाव में सपा से टिकट कटने की आशंका पर उन्होंने बसपा में घर वापसी की, लेकिन निकाय चुनाव में बसपा से भी टिकट नहीं मिलने पर पत्नी को निर्दलीय ही चुनाव में उतारा और जीत दर्ज की।
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