जमीयत के सचिव नियाज अहमद फारुकी ने बताया कि गृह मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत की गई मांगों को ध्यान से पढ़ा और देश की सांप्रदायिक स्थिति पर कहा कि इस बार रामनवमी त्योहार के अवसर पर जो धार्मिक तनाव और हिंसा हुई है, उससे हम भी चिंतित हैं। जिन राज्यों में हमारी सरकारें नहीं हैं, वहां हमने राज्यपाल या मुख्यमंत्री के जरिए इसे नियंत्रित करने की कोशिश की है और जहां हमारी सरकारें हैं, वहां जो भी घटनाएं हुई हैं, जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि गृहमंत्री ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं के संबंध में कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं देश के किसी भी हिस्से में हुई हों, हमें यह देखने की जरूरत है कि हत्या की स्थिति में क्या धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज हुआ है या नहीं। अगर नहीं हुआ है तो आप हमें लिख कर भेजें। हम इसे तत्काल सुनिश्चित करेंगे। नियाज अहमद फारुकी ने बताया कि इस संबंध में जमीयत जल्द ही ऐसी घटनाओं की सूची बनाकर गृहमंत्री को भेजेगी।
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प्रतिनिधिमंडल में यह रहे शामिल
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में मौलाना महमूद मदनी के अलावा मरकजी जमीयत अहले हदीस हिंद के मौलाना असगर अली इमाम मेहदी सलफी, नासेह एजुकेशनल ट्रस्ट बंगलौर के अध्यक्ष मौलाना शब्बीर नदवी, ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुकी, खुसरो फाउंडेशन दिल्ली के अध्यक्ष प्रोफेसर अख्तरुल वासे, एमसीई सोसायटी पुणे महाराष्ट्र के चेयरमैन पीए इमानदार, अंजुमन-ए-इस्लाम मुंबई के अध्यक्ष डॉ. जहीर काजी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना सलमान बिजनौरी, जमीयत के दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी, जमीयत उलमा महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना नदीम सिद्दीकी, जमीयत उलमा कर्नाटक के अध्यक्ष मुफ्ती इफ्तिकार अहमद, जमीयत के महासचिव मुफ्ती शमशुद्दीन, हरियाणा जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अली हसन मजाहिरी, महासचिव मौलाना याहया, केरला जमीयत के अध्यक्ष मौलाना इब्राहीम, तमिलनाडू के महासचिव हाजी हसन अहमद और कार्यकारिणी सदस्य मौलाना नियाज अहमद फारुकी शामिल रहे।