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Saharanpur News: सहारनपुर बना सियासी केंद्र, शुरू हुई 2027 की बिसात

Wed, 06 May 2026 01:22 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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सहारनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सात मई को देवबंद दौरा सिर्फ विकास परियोजनाओं के लोकार्पण तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। एक ही जिले में तीन महीने के अंदर मुख्यमंत्री का यह तीसरा दौरा है, जो सहारनपुर की राजनीतिक अहमियत को साफ तौर पर दर्शाता है।
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देवबंद मुख्यमंत्री इस दौरान कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही जनसभा को संबोधित भी करेंगे। इससे पहले 14 अप्रैल को एक्सप्रेसवे लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री जिले में आए थे, जहां गणेशपुर में जनसभा के जरिए उन्होंने सरकार की उपलब्धियों को गिनाया था। वहीं, 14 मार्च को उनका दौरा धार्मिक और विकास दोनों नजरिए से अहम रहा, जब उन्होंने मां शाकंभरी सिद्धपीठ पर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया और दर्शन भी किए। लगातार दौरों से यह स्पष्ट है कि सरकार विकास और आस्था दोनों मुद्दाें से साधने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो हाल ही में पांच राज्यों में मिली जीत के बाद भाजपा अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। सहारनपुर और देवबंद जैसे क्षेत्र सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं, जहां राजनीतिक समीकरण अक्सर बदलते रहते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के लगातार दौरे कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और विपक्ष को संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हैं। इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह का हालिया दौरा भी संगठनात्मक मजबूती की ओर इशारा करता है। पिछले कुछ दिनों से पार्टी शीर्ष नेतृत्व का लगातार जिले में सक्रिय रहना यह दर्शाता है कि भाजपा 2027 के चुनाव से पहले बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गई है।
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इसलिए अहम है देवबंद में जनसभा
जनसभा के लिए देवबंद क्षेत्र का चयन भी राजनीतिक दृष्टि से अहम है। यह क्षेत्र धार्मिक पहचान के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी प्रभावशाली रहा है। यहां से दिया गया संदेश पूरे पश्चिमी यूपी में असर डाल सकता है। ऐसे में विकास परियोजनाओं के बहाने जनता के बीच पहुंचकर सरकार अपनी छवि मजबूत करने और विपक्ष की जमीन कमजोर करने की कोशिश कर रही है। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री का यह दौरा सिर्फ विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी रणनीति का हिस्सा नजर आ रहा है, जिसके जरिए भाजपा 2027 की चुनावी तैयारी का बिगुल फूंकती दिख रही है।
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