सहारनपुर। परिषदीय विद्यालयों में आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार होने वाले मध्याह्न भोजन पर भी एलपीजी का संकट है। अनेक विद्यालयों में सिलिंडर खाली हो चुके हैं। ऐसे में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने में परेशानी आ रही है। बच्चे भूखे न रहें। इसके लिए मजबूरन लकड़ी का चूल्हा भी चलाना पड़ रहा है। ऐसे में विभाग की ओर से मिड-डे मील अथॉरिटी को पत्र लिखकर एक महीने की एलपीजी की मांग की गई है।
जनपद में 1,446 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। नगर क्षेत्र के विद्यालयों में एनजीओ द्वारा पका पकाया भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जबकि देहात के विद्यालयों में बनी रसोई में ही मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। मध्याह्न भोजन सिलिंडर से चलने वाले चूल्हे पर ही पकाने का नियम है। लकड़ी का चूल्हा चलाना मना है। ऐसा करते पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन गैस की किल्लत के कारण अनेक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन पर संकट है। सिलिंडर पाने के लिए शिक्षक भटक रहे हैं, लेकिन सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। चूंकि बच्चों को मध्याह्न भोजन दिया जाना जरूरी है। ऐसे में वह मजबूरन लकड़ी के चूल्हे पर आ गए हैं। बता दें, कि मध्याह्न भोजन के लिए प्रत्येक विद्यालय को महीने में कम से कम तीन और अधिकतम आठ से दस सिलिंडर तक चाहिए।
गैस की कमी को देखते हुए मिड-डे मील अथॉरिटी को पत्र लिखकर एक महीने की गैस की मांग की गई है। स्थानीय स्तर पर भी संबंधित विभाग से संपर्क किया जा रहा है, जिससे की मध्याह्न भोजन पकाने के लिए पर्याप्त सिलिंडर मिलते रहें।
- कोमल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए सिलिंडर की कमी का कोई मामला सामने नहीं आया है। यदि विभाग के स्तर से ऐसी कोई मांग की जाती है तो आपूर्ति कराई जाएगी।
- नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी