शिवालिक में 312 कैमरों में कैद हुईं दुर्लभ प्रजातियां
सहारनपुर। सहारनपुर के शिवालिक वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्रों में ऐसे-ऐसे जीव हैं, जिनके बारे में पता ही नहीं था। विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की ओर से लगाए गए 312 कैमरों की पड़ताल की गई तो कई संकटग्रस्त प्रजातियों की मौजूदगी मिली। वहीं, मुख्य वन संरक्षक सहारनपुर ने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून को पत्र भेजकर सुझाव मांगा है, ताकि उत्तरप्रदेश के चौथे टाइगर रिजर्व के रूप में शिवालिक वन क्षेत्र को विकसित किया जा सके।
सहारनपुर वन परिक्षेत्र में तेंदुओं को लेकर तो पहले ही रिपोर्ट आ गई थी। 200 कैमरों में 52 तेंदुए कैद हुए थे। अब 312 कैमरों की पड़ताल की गई तो येलो थ्रोटेड मार्टन्स और सीविट बिल्लियों की तीन किस्में कॉमन, पाम और मास्कड भी कैद हुई हैं। ये सभी प्रजातियां बेहद संकटग्रस्त श्रेणी में हैं। शिवालिक वन क्षेत्र के मोहंड और बडकला रेंज में ये प्रजातियां पाई गई हैं। बाघों के लिए जरूरी चीतल, सांभर, जंगली सूकर आदि कई वन्य जीव यहां मौजूद हैं।
प्राकृतिक रूप से अधिक समृद्ध है यह क्षेत्र
राजाजी टाइगर रिजर्व उत्तराखंड से सटे होने की वजह से यह वन क्षेत्र प्राकृतिक तौर पर समृद्ध है। गंगा और यमुना नदी की सीमा के मिलने से वन्य जीव विशेषकर हाथी हरियाणा के केलसर तक पहुंचते हैं। इस लिहाज से यह न केवल टाइगर रिजर्व बल्कि हाथियों के लिए भी बेहतरीन गलियारा हो सकता है।
वर्जन
शिवालिक वन क्षेत्र में मोहंड, शाकंभरी और बडकला रेंज आती है। यहां पहली बार कैमरा ट्रैप से विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। जल्द ही इसे टाइगर रिजर्व बनाने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा। यूपी के अब तक के टाइगर रिजर्व अमानगढ़ बिजनौर से कहीं बड़ा एरिया अस्तित्व में आया तो शिवालिक टाइगर रिजर्व का होगा। पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां, 56 से अधिक तितलियों भी यहां मिली हैं।
- संजय कुमार, कमिश्नर सहारनपुर मंडल
- 315 कैमरे की जांच में कई प्रजातियां पहली बार रिकार्ड में आई हैं। डाटा बेस तैयार कर लिया है, जो डब्ल्यूडब्लूआई देहरादून को और प्रमाणिकता के लिए भेजा जा रहा है। ताकि टाइगर रिजर्व पर मजबूती से कदम बढ़ाया जा सके।
- वीके जैन, मुख्य वन संरक्षक/प्रभारी वन संरक्षक, सहारनपुर परिक्षेत्र
- उत्तरप्रदेश के शिवालिक का सबसे बेहतरीन जंगल वन्य जीवों और वनों के लिहाज से देखें, तो मोहंड से लेकर बादशाही बाग तक का क्षेत्र है। इसी तरह से राजाजी टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों का प्राकृतावास है। टाइगर रिजर्व बनाने के लिए थोड़ा प्रयास ये करना होगा कि वन गुर्जर जो शिवालिक के क्षेत्र में रह रहे हैं, उन्हें जंगल से निकालकर मुख्य धारा से जोड़ा जाए। टाइगर रिजर्व बनाने की दिशा में गंभीरता से काम चल रहा है।
- डॉ. विभाष पांडव, वन्य जीव वैज्ञानिक, डब्ल्यूआईआई, देहरादून
मुख्य वन संरक्षक वीके जैन- फोटो : SAHARANPUR
डब्ल्यूडब्ल्यूआई देहरादून के वन्य जीव वैज्ञानिक डॉ. विभाष पांडव।- फोटो : SAHARANPUR
न्य जीव सीवेट कैट- फोटो : SAHARANPUR
वन्य जीव लैपर्ड कैट- फोटो : SAHARANPUR
वन्य जीव मार्टिन- फोटो : SAHARANPUR