नैतिकता के साथ जीवन जीना सिखाता है रमजान
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि रमजान इंसान को नैतिकता के साथ जीवन जीना सिखाता है। जीवन की बुनियादी चीजों से दूर रहकर रोजा आत्म संयम और सहनशीलता का पाठ भी पढ़ाता है। रमजान का एक महीना व्यक्ति को पूरे साल का प्रशिक्षण देने के लिए आता है कि वह जीवन के पथ पर बेकाबू होकर भागने के लिए नहीं आया है, बल्कि जीवन की महत्व को समझने के लिए भेजा गया है।
सवाल- रसूलपुर निवासी फाजिल ने पूछा कि वह रोजे की हालत में उनके कान में नहाते समय पानी चला गया। क्या इससे उनका रोजा टूट जाएगा। क्या वह रोजे की हालत में कान में दवा डाल सकते हैं।
जवाब- शरीयत में आया है कि रोजे की हालत में जानबूझकर यदि कोई कान के अंदर पानी या दवा डालता है तो उसका रोजा टूट जाएगा, लेकिन खुद पानी जाने से रोजा नहीं टूटेगा।
सवाल- गाजियाबाद निवासी जमाल ने पूछा कि रमजान के रोजे इस्लाम में किस हिजरी (सन) में फर्ज हुए। क्या शरीयत में इसका जिक्र है।
जवाब- जी हां, रमजान के रोजे ऐलान ए नबुवत के बाद सन दो हिजरी में फर्ज हुए।
सवाल- माहिपूरा निवासी कलीम अहमद ने पूछा कि किसी व्यक्ति ने मकान किराए पर दिया हुआ है तो उसकी जकात का शरीयत में क्या हुक्म है।
जवाब- शरीयत के अनुसार यदि उसका किराया निसाब को पहुंचे तो उसकी जकात वाजिब होगी।