दूल्हा और दुल्हन बने जितेंद्र और जूली
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बड़गांव (सहारनपुर)। रेलवे में टेक्नीशियन के पद पर तैनात युवक ने शादी में बतौर शगुन मिल रही पांच लाख रुपये की रकम को वापस कर दहेज रहित शादी कर मिसाल पेश की है। युवक की इस पहल की सभी प्रशंसा कर रहे हैं।
ग्राम चंदपुर मजबता निवासी रतन सिंह के बेटे जितेंद्र कुमार रेलवे के अंबाला डिविजन में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत है। जितेंद्र का रिश्ता बड़गांव निवासी अनिल चौहान पुत्री जूली से तय हुआ था। 11 दिसबंर की रात उनकी शादी थी। बारात को लेने के वक्त जब अनिल ने अपने होने वाले दामाद को शगुन के तौर पर पांच लाख रुपये देने चाहे तो उसने उन्हें लेने से साफ मना कर दिया। जितेंद्र ने कहा वह केवल नारियल और एक रुपया लेगा। उसके लिए उसकी होने वाली दुलहन ही दहेज है। दूल्हे की इस पहल की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
वधू जूली के पिता अनिल चौहान खेती करते है, जबकि मां प्रवेश देवी गृहणी है। दूल्हे जितेंद्र कुमार के माता-पिता उषा देवी व रतन सिंह भी बिना दहेज की शादी से काफी खुश है। जितेंद्र कुमार ने बताया कि दहेज के चक्कर में कई युवतियों की जिंदगी नरक बन चुकी है। लालच या झूठी शान के लिए लोग दहेज को प्रतिष्ठा का विषय बनाते हैं जो कि गलत है। उन्होंने युवाओं से बिना दहेज की शादी करने का अनुरोध किया। दुल्हन जूली ने बताया कि पहले तो पिताजी ने समृद्ध परिवार में शादी करने से मना कर दिया था, लेकिन पति जितेंद्र कुमार ने बिना दहेज की शादी करने व जीवन में कभी दहेज संबंधी कोई बात नहीं करने का स्वयं व पूरे परिवार की ओर से विश्वास दिलाया। इसके बाद ही वह शादी के लिए तैयार हुई थी। शनिवार को आशीर्वाद समारोह में भी बिना दहेज की इस शादी की खूब चर्चा रही।