सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीति की धुरी रहे काजी और चौधरी परिवार एक बार फिर राजनीतिक विरासत बचाने में नाकाम साबित हुए हैं। काजी रशीद मसूद परिवार से नोमान मसूद गंगोह सीट पर बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में थे। इसी सीट पर चौधरी यशपाल सिंह के छोटे पुत्र इंद्रसेन सपा के टिकट पर ताल ठोक रहे थे, लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों को भाजपा के किरत सिंह के सामने हार का सामना करना पड़ा।
काजी रशीद मसूद और चौधरी यशपाल सिंह का राजनीतिक रसूख रहा है। काजी रशीद मसूद करीब छह बार सांसद और केंद्र में मंत्री रहे, जबकि चौधरी यशपाल सिंह भी कई बार विधायक, एक बार सांसद और प्रदेश में कैबिनेट मंत्री रहे, लेकिन दोनों ही परिवारों में काजी रशीद मसूद और चौधरी यशपाल सिंह के बाद कोई राजनीतिक विरासत ठीक से नहीं संभाल सका है। काजी परिवार से इमरान मसूद दो बार लोकसभा और दो बार विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं। वो 2007 में बेहट से विधायक बने थे। तब से उन्हें जीत नसीब नहीं हो सकी है। इस बार तो दल बदलने के बावजूद उनको टिकट तक नहीं मिल सका। किसी तरह विधायक बनने के लिए वह कांग्रेस में राष्ट्रीय सचिव जैसा पद छोड़कर सपा में आए थे। उनके जुड़वां भाई नोमान मसूद भी रालोद छोड़कर चुनाव से ठीक पहले बसपा में शामिल हुए, लेकिन नोमान को हार का सामना करना पड़ा। नोमान के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भी नोमान मसूद को भाजपा के प्रदीप चौधरी के सामने हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद प्रदीप चौधरी के कैराना सीट से सांसद बनने के बाद 2019 में गंगोह में हुए उप चुनाव में भी नोमान मसूद भाजपा के किरत सिंह के सामने हार गए थे। काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद भी एकबार लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं। इसी तरह चौधरी यशपाल सिंह के बाद उनके भतीजे डॉ. सुशील चौधरी एक बार नकुड़ से विधायक बने, जबकि उनके बेटे इंद्रसेन तीन बार और रुद्रसेन एक बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।(संवाद )
सांसद का नहीं दिखा प्रभाव
सहारनपुर। सहारनपुर नगर सीट पर बहुजन समाज पार्टी हमेशा से कमजोर रही है। इसकी प्रमुख वजह यहां बसपा के बेस वोट अनुसूचित जाति की संख्या कम होना है। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में बसपा के टिकट पर मुकेश दीक्षित चुनाव लड़े थे। उनको 17,350 वोट मिले थे। इस बार बसपा ने युवा नेता मनीष अरोड़ा को टिकट दिया था। मनीष को टिकट देने की एक वजह नगर सीट पर पंजाबी वोटों की संख्या 80,000 के करीब होना भी था। इसके अलावा सहारनपुर लोक सभा सीट पर हाजी फजलुर्रहमान बसपा के सांसद हैं। उम्मीद थी कि वह मनीष को मुस्लिम वोट दिलाएंगे। वह मनीष के साथ भी दिखे, लेकिन ज्यादा असर मुस्लिम मतदाताओं पर नहीं दिखा सके। नतीजा मनीष मात्र 4,680 वोटों पर सिमट कर रह गए, जो वर्ष 2017 की तुलना में एक चौथाई रहा।