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Saharanpur News: प्रदेश की नंबर एक गोशाला को निजी हाथों में देने की तैयारी

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नगर निगम की गोशाला में गोवंश। 
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- नगर निगम ने गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने को लगाए हैं करोड़ों रुपये के प्लांट
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जिस कान्हा उपवन गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने और प्रदेश और देश की नंबर एक गोशाला बनाने के लिए नगर निगम ने दिनरात एक कर दिया। करोड़ों रुपये की लागत से पेंट, गोबर गैस, फिनाइल आदि के प्लांट लगाए। अब वह गोशाला निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। इसी संबंध में प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे, जिसमें प्रदेश के सभी नगर आयुक्तों जुड़ेंगे।
नवादा रोड स्थित नगर निगम सहारनपुर की कान्हा उपवन गोशाला प्रदेश की टॉप गोशालाओं में शामिल है। इसकी वजह नगर निगम द्वारा गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए गए प्रयास और कार्य हैं। नगर निगम द्वारा गोशाला में कई तरह के प्लांट लगाए गए हैं। एक ओर जहां वह गोबर गैस प्लांट से जनरेटर चलाकर बिजली उत्पादन कर रहा है। वहीं गोबर से करीब 15 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें मूर्तियां, अगरबत्ती, गुलाल आदि शामिल हैं।
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इनके अलावा गोमूत्र से गोनाइल (फिनाइल) बनाया जा रहा है। सबसे बड़ा काम गोबर से पेंट बनाया जा रहा है, जिसके लिए अलग से प्लांट लगाया गया है। दूध उत्पादन भी गोशाला द्वारा किया जा रहा है। नगर निगम सहारनपुर को कई मंचों पर पुरस्कृत भी किया जा चुका है, लेकिन जल्द ही गोशाला की व्यवस्थाएं निजी हाथों में होंगी।
शासन का मानना है कि वर्तमान में नगरीय निकायों के सीमित वित्तीय संसाधन एवं कर्मचारियों की कमी के कारण कान्हा गोशालाओं का संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा है। ऐसे में शासन ने गोशालाओं को निजी संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों और स्वैच्छिक समूहों को सौंपने का निर्णय लिया है। शासन का तर्क है कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में गोशालाओं का संचालन निजी हाथों में है।
19 जुलाई को संयुक्त सचिव कल्याण बनर्जी द्वारा नगर निकायों को पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी गई है। साथ ही बताया है कि 23 जुलाई की दोपहर 12 बजे प्रमुख सचिव इस संबंध में वीडियो कांफ्रेंस करेंगे, जिसमें सभी नगर आयुक्तों का जुड़ना जरूरी है।
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- निकायों द्वारा संचालित गोशालाओं को लेकर एक पत्र आया है। इसी संबंध में प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग कल 23 जुलाई को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बैठक लेंगे। उसके बाद ही स्थिति साफ होगी कि गोशालाओं का संचालन किसके द्वारा किया जाएगा। - डॉ. संदीप मिश्रा, प्रभारी, कान्हा उपवन गोशाला।
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