फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आंदोलन से बदल गए थे राजनीतिक समीकरण

विज्ञापन
श्री राम मंदिर आंदोलन: पूर्व भाजपा विधायक लाजकृष्ण गांधी। - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सहारनपुर। श्रीराम मंदिर आंदोलन जिले में भी भाजपा के लिए संजीवनी बना रहा। शहर में वर्चस्व कायम रखने वाली भाजपा की लहर गांव-गांव पहुंच गई थी। शहर और तब नागल विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी विधायक बने थे तो बाकी सीटों पर बेहद ही कम वोटों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे।
विज्ञापन

पांच अगस्त को अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। लंबे संघर्ष के बाद इस दिन को देखने के लिए लोग उत्साहित हैं। ऐसे में 1990 के दशक में चल रहे श्री राम मंदिर आंदोलन को भी लोग याद कर रहे हैं। इस आंदोलन के दौरान भाजपा की लहर चल पड़ी थी। नगर विधानसभा सीट पर ही अपना वर्चस्व कायम रखने वाली भाजपा गांव-गांव तक पहुंच गई थी और लोग भाजपा से जुड़ते चले गए थे। शहर के अलावा पूरे जिले में भाजपा संगठन मजबूत होता चला गया था। दूसरी तरफ लोग आरएसएस, विहिप, बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी से भी जुड़ते चले गए। आंदोलन को लेकर नौजवानों में भारी उत्साह था। भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र अटल, पूर्व विधायक लाज कृष्ण गांधी और डॉ. मामचंद लांबा बताते हैं कि 1991 में हुए चुनाव में शहर सीट से लाज कृष्ण गांधी और नागल से मामचंद लांबा भाजपा के टिकट पर विधायक बने। यह दोनों नेता दो बार विधायक रहे। इसके अलावा अन्य सीटों पर भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। कोई 700 वोटों से हारा तो कोई मात्र तीन से चार सौ वोटों से ही हारा था। इसके बाद से भाजपा लगातार मजबूत होती चली गई। वर्तमान में जिले की सात विधानसभा सीटों में नकुड़ से डॉ. धर्म सिंह सैैनी विधायक और आयुष राज्यमंत्री हैं। इसके अलावा देवबंद से ब्रिजेश सिंह, रामपुर मनिहारान से देवेंद्र निम, गंगोह से किरत सिंह भाजपा विधायक हैं। बाकी बेहट विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी महावीर राणा और सहारनपुर देहात विधानसभा सीट से मनोज चौधरी कड़े मुकाबले में रहकर हार गए थे। नगर विधानसभा से निवर्तमान विधायक राजीव गुंबर दूसरे नंबर पर रहे थे।
लोकसभा चुनाव में तभी से बढ़ी ताकत
सहारनपुर। विधानसभा चुनाव के अलावा लोकसभा चुनाव में भी 1990 के बाद भाजपा को जिले में मजबूती मिलती गई। 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नकली सिंह दूसरे नंबर पर रहे थे, जबकि 1996 में उन्होंने सपा प्रत्याशी काजी रशीद मसूद को हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1998 में हुए मध्यावधि चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नकली सिंह ने बसपा प्रत्याशी कांशीराम को हराया था। हालांकि इसके बाद भाजपा पिछड़ गई थी और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राघव लखनपाल शर्मा सहारनपुर सीट पर जीते। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद को हराया था।
विज्ञापन

हवा के झोंके से बार-बार बुझता था वरुण का दीपक
सहारनपुर। भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र अटल बताते हैं कि विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में 30 अक्तूबर 1990 को कार सेवा करने की घोषणा की थी। श्रीराम भक्तों को पकड़कर जेल में डाल दिया गया था। जैसे-जैसे कारसेवा के लिए निश्चित तिथि 30 अक्टूबर नजदीक आ रही थी तो पुलिस प्रशासन की परेशानी बढ़ती जा रही थी। सहारनपुर में राम कार सेवा समिति के सभी सदस्य पुलिस के भय से अपने घरों को छोड़ चुके थे। हमें किसी भी कीमत पर गिरफ्तारी से बचने का निर्देश था। वह भी किसी परिचित के घर कभी किसी के खाली फ्लैट में रुककर कारसेवकों के साथ योजना बनाते थे। लोग राम ज्योति स्थापित कर दीपावली पर राम ज्योति से दीपमाला प्रज्ज्वलित करके अपने घरों में दीपक जलाने के लिए इच्छुक थे। जिले में राम ज्योति यात्रा का भी स्वागत हो रहा था। उनका 10 वर्षीय बेटा वरुण दीपावली के दिन घर के अंदर दीप जलाने के लिए एक किलोमीटर दूर स्थित हरि मंदिर में स्थापित की गई राम ज्योति से दीपक जलाकर लाया था, मगर हवा के झोंके से दीपक बार-बार बुझता जाता था। वह फिर वापस मंदिर जाता और फिर दीपक जलाकर लेकर आता, लेकिन हवा से फिर दीपक बुझ जाता था। लगातार सात बार की कोशिश के बाद वह घर पर राम ज्योति से प्रज्ज्वलित दीप को लाने में सफल हुआ।

श्री राम मंदिर आंदोलन: पूर्व भाजपा सांसद नकली सिंह। फाइल फोटो- फोटो : SAHARANPUR

श्री राम मंदिर आंदोलन: वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र अटल।- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें