सहारनपुर। कोविड-19 की जांच बढ़ने के साथ ही कोरोना पॉजिटिव तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे लोगों पर तनाव भी हावी हो रहा है। तनाव के कारण भी कई हैं, जो कोरोना काल में पैदा हुए हैं। इनमें गिरता व्यापार, बेरोजगारी और परिवार में कलह बड़ा कारण हैं।
दरअसल, चार दिन पहले ही मंडी कोतवाली क्षेत्र में एक युवक ने बेटी की हत्या के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसने सुसाइड में मानसिक तनाव का जिक्र किया था, जो पारिवारिक कलह के कारण बना हुआ था। वहीं, देहात क्षेत्र में एक व्यक्ति कोरोना के डर से आत्महत्या तक कर चुका है। इन दोनों मामलों के अलावा आत्महत्या की कोशिश के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। इन्होंने तनाव को हराया
अप्रैल माह में चीन से लौटे सचिन कोरोना संक्रमित मिले थे। एसबीडी जिला अस्पताल परिसर स्थित आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रहे। वह बताते हैं कि उस समय तनाव था, लेकिन स्मार्ट फोन के जरिए परिजनों से वीडियो कॉलिंग कर बात होती थी। परिजन हौसला बढ़ाते थे। डॉक्टरों ने भी सहयोग किया, जिससे तनाव कम हुआ। एल-2 कोविड सेंटर में भर्ती रहे 67 वर्षीय मो. खालिद ने बताया कि उनको बीपी और शुगर की समस्या रहती है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद वह तनाव में थे। वार्ड में भर्ती अन्य मरीज उनका सहारा बने। उनसे बातचीत कर मन हल्का होता था।
कोरोना को लेकर तनाव में थे मरीज - पोपली
मनोचिकित्सक डॉ. अमरजीत पोपली ने बताया कि कोरोना के शुरूआती दौर में संक्रमित मरीज कोरोना को लेकर काफी डरे हुए थे। चूंकि लॉकडाउन की वजह से ओपीडी बंद थी। ऐसे में मरीज फोन पर या वीडियो कॉल के जरिए सलाह मांगते थे। प्रतिदिन एक या दो मरीज इस तरह के आते थे। ऐसे मरीजों को डर को भूलकर खुद को व्यस्त रखना चाहिए और मेडिटेशन व अन्य कसरत करनी चाहिए।
तनाव और अवसाद के लक्षण
घबराहट, अत्यधिक बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत, ठीक से नींद नहीं आना, बहुत ज्यादा चिंता, बेसहारा महसूस करना, खाना छोड़ देना, उदास रहना, कुछ लोगों का आत्महत्या की कोशिश करना आदि।
यह करें मरीज
- डर को भूलकर खुद को अधिक से अधिक व्यस्त रखे।
- स्मार्ट फोन पर अपने चहेते मित्रों से वीडियो कॉल के जरिए बात करें, परिजनों से बात करें।
- टीवी पर अपनी मनपसंद फिल्म का सीरियल देखकर, मोबाइल पर व्यस्त रहकर या कोई खेल खेलकर तन और मन दोनों को हल्का रखे।
- योग करें और सुबह शाम टहलने निकले।