सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल में शनिवार को अचानक से ओपीडी बंद कर दी गई। ऐसे में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को बिना परामर्श और दवाओं के मायूस होकर लौटना पड़ा। कई मरीजों को मजबूरन बाहर से दवा खरीदनी पड़ी।
कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद की ओर से पत्र जारी किया गया है, जिसमें जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में केवल आवश्यक एवं आकस्मिक यानी इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने के आदेेश दिए हैं। आवश्यक सेवाओं में गर्भवती महिलाओं और बच्चों का इलाज और प्रसव को भी शामिल किया गया है। शासन के आदेश के अनुपालन में जनपद के सरकारी अस्पतालों में शनिवार से ओपीडी सेवाएं बंद कर दी गई हैं। शनिवार को इलाज के लिए एसबीडी जिला अस्पताल पहुंचे सैकड़ों मरीज ओपीडी बंद देख मायूस हुए। जिन मरीजों की पहले से दवा चल रही है और उन्हें और दवाएं चाहिए थीं। उनको दवाएं तक नहीं मिलीं, क्योंकि दवा के लिए चिकित्सक द्वारा नई पर्ची बनाना जरूरी होता है। ऐसे में अस्पताल के दवा स्टोर भी बंद ही रहे।
इमरजेंसी सेवाएं रहीं जारी
गंभीर मरीजों को परेशानी ना हो। इसके लिए शासन ने इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने को कहा है। ऐसी स्थिति में शनिवार को इमरजेंसी सेवा जारी रही। नतीजा यह रहा कि ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों को भी मजबूरन इमरजेंसी वार्ड जाना पड़ा, जहां से सामान्य मरीजों को लौटा दिया गया।
पीड़ितों की बात
-बुड्ढाखेड़ा से दवा लेने जिला अस्पताल पहुंची कमलेश ने बताया कि उसकी दवा खत्म हो गई है। वह दवा लेने के लिए अस्पताल आई थी, मगर दवा स्टोर बंद है। ऐसे में समझ नहीं पा रही हैं कि क्या करें।
-हिम्मत नगर निवासी सुधा रानी को आंख में समस्या है। वह आंखों के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंची थी, मगर ओपीडी बंद होने की वजह से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।
ई-ओपीडी में 55 लोगों ने लिया परामर्श
ओपीडी बंद होते ही ई-संजीवनी ओपीडी पर मरीजों की संख्या बढ़ गई है। शनिवार को बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बिरेंद्र भट ने साथी चिकित्सक के साथ ई-ओपीडी में मरीजों की समस्याएं सुनकर उनको परामर्श दिया। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक कुल 55 मरीजों ने सेेवा ली।