सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने शनिवार को भी हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों का जवाब दिए। उन्होंने कहा रोजा व्यवहार, इंसानियत, हमदर्दी व गमख्वारी का सबक देता है, जब इंसान भूख की वजह से दुश्वारियां बर्दाश्त करता है, तो उसके दिल में गरीबों व भूखों के लिए हमदर्दी एवं भलाई का जज्बा पैदा होता है।
सवाल---मदनपुरी निवासी नफीस ने पूछा कि वह नौकरी पेशा व्यक्ति है और उनकी माह की आमदनी 70 हजार रुपये है, लेकिन घर के खर्च ज्यादा हैं। इसलिए साल भर तक उनके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं होती। क्या ऐसी सूरत में भी उन पर जकात फर्ज है।
जवाब--जी नहीं, शरीयत में आया है कि जिस व्यक्ति की आमदनी माकूल हो, लेकिन वर्ष भर तक उसके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं रहती तो, उस पर जकात वाजिब नहीं होती।
सवाल-- मुजफ्फरनगर निवासी अकरम खान ने पूछा कि वह पुलिस विभाग में नौकरी करते हैं। रमजान के चलते विभाग की तरफ से तीन दिन के लिए जनपद बाराबंकी का सफर करना है और गर्मी बहुत है। अब ऐसी स्थिति में रोजा कजा कर सकते हैं क्या।
जवाब-- जी हां, अगर कोई व्यक्ति सफर में हो, जिसको शरीयत सफर मानती है तो उस व्यक्ति को रोजा कजा करने की इजाजत है।
इन नंबरों पर पूछे सवाल
हेल्पलाइननंबर 9897399207, 9557757705, व 0132-2659848 पर रोजेदार दोपहर 12 से तीन बजे तक सवाल पूछ सकते हैं। इनके अलावा इन्हीं नंबरों पर व्हाट्सएप भेजकर या ईमेल ishaqgora@gmail.com और helplineishaqgora@gmail.com पर भी सवाल पूछ सकते हैं।