सहारनपुर। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की किल्लत के बाद जनपद में 13 नए ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट स्थापित किए गए हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि जिले भर में फैले इन प्लांट के लिए मात्र एक विशेषज्ञ ऑपरेटर मिला है। प्लांट के संचालन के लिए अस्पताल के कर्मचारियों को ही प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो विशेषज्ञ नहीं हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल में दो, जिला महिला अस्पताल में एक तथा शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज पिलखनी में एक ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट लगाया गया है। मेडिकल कॉलेज में खराब पड़े ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट को भी ठीक कराया गया है। इसके अलावा नौ सीएचसी पर एक-एक ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट लगाया गया है। इनमें सीएचसी फतेहपुर, सीएचसी नानौता, सीएचसी रामपुर मनिहारान, सीएचसी नागल, सीएचसी रणखंडी, सीएचसी जड़ौदा पांडा, सीएचसी गंगोह, सीएचसी नकुड़ और सीएचसी सरसावा शामिल हैं। खास बात यह है कि अभी तक इन प्लांट्स पर विशेषज्ञ कर्मचारियों की तैनाती नहीं की गई है। सभी 13 प्लांट को ऑपरेट करने या उनकी गड़बड़ी को ठीक करने के लिए केवल एक विशेषज्ञ कर्मचारी मिला है, जबकि प्लांट शहर से लेकर देहात में चारों और स्थापित हुए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों में जो भी कर्मचारी ऐसे लगे हैं, जिनको थोड़ा भी तकनीकी ज्ञान है, उनको प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे जरूरत पड़ने पर प्लांट को ऑपरेटर किया जा सके।
प्रतिदिन 89,25,000 लीटर ऑक्सीजन पैैदा करने की क्षमता
जिले में स्थापित 13 नए तथा एक पुराने ऑक्सीजन प्लांट को मिलाकर कुल 14 ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट हो गए हैं, जो चालू अवस्था में हैं। 14 ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट की क्षमता एक दिन में 89 लाख 25 हजार लीटर ऑक्सीजन तैयार करने की है। जो जरूरत पड़ने पर बड़े काम आ सकती है। इसके अलावा ऑक्सीजन सिलिंडर की भी व्यवस्था जारी है।
ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट्स के लिए एक ही विशेषज्ञ कर्मचारी मिला है। इसके अलावा प्लांट्स को चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ऐसे कर्मचारियों को तैयार कर रहा है, जो थोड़ी भी तकनीकी जानकारी रखते हैं। प्रत्येक प्लांट के लिए दो से तीन लोग तैयार किए गए हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर प्लांट को चलाया जा सके।
- डॉ. नवदीप सिंह, प्रभारी