आक्रोश: जुलूस निकाला, घंटाघर पर हंगामा प्रदर्शन
सहारनपुर। हाथरस कांड में बिटिया की मौत और उसके अंतिम संस्कार के समय पुलिस के रवैये के खिलाफ बृहस्पतिवार को वाल्मीकि समाज का आक्रोश फूट पड़ा। सफाई कर्मचारियों सहित कई संगठनों से जुड़े वाल्मीकि समाज के लोगों ने नगर निगम से लेकर घंटाघर चौक तक जुलूस निकाला। घंटाघर चौक पर मानव शृंखला बनाई और प्रदर्शन कर हाईवे जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन चला।
अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा, उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ सहित अन्य संगठनों से जुड़े वाल्मीकि समाज के लोग बड़ी संख्या में सुबह दस बजे से ही नगर निगम परिसर में इकट्ठा हो गए। इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। रेलवे स्टेशन की ओर से आए लोग भी यहां पहुंचे। करीब एक घंटे बाद अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के प्रदेश महासचिव सोनी आजाद, जिलाध्यक्ष धीरज आजाद, उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ के मंडलीय महामंत्री बृजमोहन चनालिया सहित अन्य के नेतृत्व में सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में निकले। अंबाला रोड से होते हुए घंटाघर चौक पर पहुंचे और मानव शृंखला बनाकर चारों ओर से वाहनों का आवागमन रोक दिया।
इसके बाद बिटिया को इंसाफ दो, आरोपियों को फांसी दो, जय भीम, इंकलाब जिंदाबाद जैैसे नारे लगाए गए। इस दौरान अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) एसबी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार सोनी, एसपी सि टी विनीत भटनागर, सीओ डीपी तिवारी सहित पुलिस बल मौजूद रहा। करीब दो घंटे तक बाद अपर जिलाधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। अधिकारियों ने कहा कि उनकी बात शासन तक पहुंचाई जाएगी। प्रदर्शन समाप्त होने पर लोग नारेबाजी क करते हुए नगर निगम कार्यालय परिसर लौट गए। इस दौरान नीरज कुमार, लक्ष्मण सिंह, अनुज बोहत, राजीव घावरी, सोमपाल दिलौड़, विकास चंचल, मनमोहन सूद, तिलक राज, अनवर सादात, रघुवीर चंदेल, महेंद्र बेदी, अमरीश, सुनील घाघट, कुलदीप, महेंद्र राजपूत, अमित कुमार, अंबर चंदेल, मुकेश घावरी, राजकुमार चौहान, विनोद सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल रहे।
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बिटिया को इंसाफ मिलने तक चुप नहीं बैठेंगे
- हंगामे के दौरान प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि बिटिया को इंसाफ मिलने तक वे चुप नहीं बैठेंगे। पीड़ित परिवार के लिए करीब एक करोड़ रुपये आर्थिक सहायता और पीड़ित परिवार को पर्याप्त सुरक्षा की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और दूसरे वर्ग के दबाव में आकर पुलिस पीड़ित पक्ष के साथ अन्याय कर रही है, यह सही नहीं है।