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जैविक खेती मृदा का रखेगी ख्याल, सेहत रहेगा खुशहाल

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जैविक खेती - फोटो : SAHARANPUR
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जैविक खेती मृदा का रखेगी ख्याल, सेहत रहेगा खुशहाल
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सहारनपुर। उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग केवल मृदा की उर्वरा ही नहीं खराब कर रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। इस दशा में जैविक खेती बेहतर माध्यम है। जिले में ऐसे कई किसान है जो जैविक खेती कर रहे हैं और दूसरों को भी जागरूक कर रहे हैं।
खेती में उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग ने सिर्फ मानव स्वास्थ्य को प्रभावित किया है बल्कि मृदा को भी बीमार बना दिया है। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इनके प्रयोग से मृदा में पोषक तत्वों के साथ जैविक कार्बन कमी आ गई है। कृषि उत्पादों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इससे किसानों के साथ उपभोक्ताओं में जैविक उत्पादों के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
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जिले के कई जागरूक किसानों ने जैविक खेती में कदम रखा है। इसमें खाद्यान्न, फलों से लेकर सब्जियां तक शामिल हैं। कई किसान जैविक उत्पादों को प्रोसेस कर बाजार में बेच रहे हैं। जनपद में इस समय एक दर्जन से अधिक किसान जैविक खेती कर रहे हैं।
अनुकूल है जैविक खेती
जैविक खेती में न तो रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग होता है और न ही रासायनिक कीटनाशकों का। इसमें भूमि में गोबर की खाद, कम्पोस्ट , बर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद का उपयोग पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए किया जाता है। कीटनाशक के तौर पर नीमास्त्र (जो कि नीम की पत्तियों को उबालकर और निंबोली के तेल से बनता है) इसे अलावा तंबाकू, लाल मिर्च और सड़ी हुई लस्सी के मिश्रण का भी उपयोग कीटनाशकों के रूप में किया जाता है। फसल अवशेष को अपघटित करने के लिए किसान पूसा डी कम्पोजर का प्रयोग किया जाता है।
किसान बोले
- बीमार हुए तो मिली जैविक खेती की सीख
गांव बंदाहेड़ी के किसान महावीर सिंह को जैविक खेती की प्रेरणा चंडीगढ स्थित पीजीआई के डॉक्टरों से मिली। बीमार होने के चलते उन्होंने स्वास्थ्य की जांच चंडीगढ़ में कराई। डाक्टरों ने उन्हें बताया कि उनका खानपान और जीवन शैली उनकी बिमारी के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद उन्होंने 2016 से किसान प्रोड्यूसर कंपनी बनाकर समूह में जैविक खेती करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि वे देशी गेहूं (बंशी प्रजाति), काला गेहूं, धान, उड़द और सरसों के साथ ही सब्जियों की जैविक खेती कर रहे हैं। इसके अलावा वे नींबू और अमरूद की भी जैविक बागवानी कर रहे हैं।
किसानों को भी जागरूक कर रहे डॉक्टर महीपाल
केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय में निदेशक पद से सेवानिवृत्ति डॉक्टर महीपाल ने गांव बहादरपुर में जैविक खेती शुरू की। किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। कृपा फाउंडेशन के जरिए वर्ष 2019 में जैविक खेती शुरू की। स्वीटकॉर्न (मीठी मक्का), जौं , काला गेहूं, देशी गेहूं , देशी बासमती, काला धान की जैविक खेती कर रहे हैं। सब्जियों में लौकी ,गाजर, शलजम, चकुंदर , पालक, चना, सरसों, हरा धनिया, मटर, मेथी, आलू , गोभी, टमाटर, प्याज, लहसुन की फसल जैविक विधि से पैदा कर रहे हैं।
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जैविक विधि से खेती मानव स्वास्थ्य के साथ ही मृदा स्वास्थ्य के भी अनुकूल है। इसमें कम लागत में उच्च गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न, फल एवं सब्जियां पैदा होती है। यह विधि किसानों के लिए आर्थिक तौर पर भी काफी लाभकारी है। जनपद में जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। -- डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र।

जेविक खेती- फोटो : SAHARANPUR

जैविक खेती करते डा महीपाल।- फोटो : SAHARANPUR

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