फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब एसटीएफ करेगी जांच और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी कर मतदाता पहचान पत्र बनाने के मामले में साइबर थाना पुलिस ने जांच रोक दी है। शासन के निर्देशानुसार ऐसा किया गया है। जल्द एसटीएफ की टीम सहारनपुर आकर मामले से संबंधित दस्तावेज लेकर जांच शुरू करेगी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी भी अब एसटीएफ ही करेगी। इस मामले में 11 आरोपी जेल जा चुके हैं, जबकि दो फरार चल रहे हैं।
विज्ञापन

शासन ने एसटीएफ को जांच के निर्देश दिए थे। एसटीएफ की लखनऊ यूनिट या फिर मेरठ यूनिट शनिवार तक सहारनपुर पहुंचकर मुकदमे से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू करेगी। साइबर थाना पुलिस ने जांच को पूरी तरह रोक दिया है। इस संबंध में की जा रही लिखा-पढ़ी को बंद कर दिया गया है। फरार आरोपी मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी हरिओम उर्फ हर्षा और विकेश की गिरफ्तार भी एसटीएफ ही करेगी। एसपी सिटी राजेश कुमार ने बताया कि अब साइबर थाना पुलिस जांच नहीं करेगी। सभी दस्तावेज एसटीएफ को सौंपे जाएंगे। इसकी को लेकर स्थानीय स्तर से पुलिस ने अपनी कार्रवाई पूरी कर चुकी है।
यह था मामला, यह आरोपी जा चुके जेल
साइबर थाना पुलिस ने 12 अगस्त की रात नकुड़ क्षेत्र के गांव मच्छरहेड़ी निवासी विपुल सैनी को गिरफ्तार किया, जो जनसेवा केंद्र चलाता था और मतदाता पहचानपत्र भी बना रहा था। वह दिल्ली निवासी अरमान मलिक हजारों मतदाता पहचानपत्र बनवा चुका है। इसके बाद कमल विहार निवासी आदित्य खत्री, आजादपुर निवासी आशीष जैन, अमन विहार निवासी अरमान मलिक उर्फ मोहम्मद नियाज आलम और सराय बस्ती दिल्ली निवासी नितिन, दीपक मेहता उर्फ टेक्निकल मेहता व उसका भाई संजीव मेहता निवासी जिला बारां राजस्थान, व हरिओम के साथी आकाश व अजय कुशवाह जेल जा चुके हैं। इनमें नितिन और आदित्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्य कर चुके हैं, जिन्होंने यूजर आईडी और पासवर्ड अन्य आरोपियों को बांटे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें