सहारनपुर। मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वालों पर एडीएम प्रशासन कोर्ट से लाखों रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इसके बावजूद जिले में मिलावटखोरी नहीं रुक रही है। पिछले दस महीने में एडीएम कोर्ट में दायर किए गए 255 विक्रेताओं पर 55.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। लेकिन विभाग के जिम्मेदार इसे गंभीरता से नहीं रहे हैं, जिसकी वजह से मिलावटखोरों पर रोक नहीं लग पा रही है।
जिले में दूध, दही, पनीर, मिठाई, मसालों सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम अभियान चलाती है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 14 पद सृजित हैं, इनमें से नौ पदों पर एफएसओ की तैनाती है। यह सभी अपने-अपने क्षेत्रों में मिलावट के शक पर नमूने लेते हैं। जिनको जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है।
टीम ने शहर से देहात तक एक अप्रैल 2023 से 31 जनवरी 2024 तक 342 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए थे। इससे पहले और इस अवधि में लिए गए 382 खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट आ गई है। 243 खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि हुई है। यानी मिलावटी खाद्य पदार्थ लोगों की सेहत को खराब कर रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने एडीएम कोर्ट में दायर किए गए 255 खाद्य विक्रेताओं पर 55.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन विभाग है कि मिलावटखोरों पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में निरीक्षण कर फैक्टरी, डेयरी और प्रतिष्ठानों से मिलावट के शक पर नमूने लेते हैं। जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। दस महीने में एडीएम कोर्ट से 255 मामलों में 55.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- अशोक कुमार शर्मा, सहायक आयुक्त खाद्य प्रथम, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन