सहारनपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के सामने इलाज जारी रखने का संकट खड़ा हो गया है। अब विभाग ने अनुपस्थित चल रहे संविदा कर्मचारियों का मानदेय नहीं देने की तैयारी कर ली है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा हिस्सा एनएचएम के संविदा कर्मचारियों के जिम्मे हैं। इनके हड़ताल पर जाने से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर कामकाज प्रभावित हो रहा है। सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर नियमित टीकाकरण की व्यवस्था बाधित होने से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को बिना टीका लगवाए लौटना पड़ रहा है। इसके अलावा विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े ऑनलाइन पोर्टल पर सूचनाएं अपडेट करने का काम भी लंबित है। कर्मचारियों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में दिक्कत आ रही है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष किशोर सैनी ने बताया कि कर्मचारी आठ अक्तूबर से हड़ताल जारी है। नियमितीकरण, समान वेतन, कैशलेस चिकित्सा सुविधा आदि मांगों को लेकर हड़ताल की जा रही है, लेकिन अभी तक उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं, हड़ताल में शामिल होकर कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के मानदेय पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। ऐसे कर्मचारियों को हड़ताल की अवधि का मानदेय नहीं दिया जाएगा। इस संबंध में विभाग ने कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
वर्जन
हड़ताल समाप्त कराने के लिए शासन स्तर पर कर्मचारियों की बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।
डॉ. शेर सिंह कक्कड़, मुख्य चिकित्सा अधिकारी