सहारनपुर की आबो-हवा खराब हो चली है। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) के यहां की नदियों के पानी और वायु प्रदूषण को लेकर जारी किए गए आदेश हैं।
हवा में प्रदूषण किस कदर फैला है? इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एनजीटी को ग्रामीण क्षेत्र के होटलों और ढाबों पर इंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाले कोयले और मिट्टी के तेल पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ा है।
एनजीटी ने पंचायती राज विभाग उत्तर प्रदेश को प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले होटलों और ढाबों पर कोयले और मिट्टी के तेल का इस्तेमाल इंधन के रूप में करने पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
आदेश के अनुक्रम में पंचायती राज विभाग ने जिला पंचायत सहारनपुर को आदेश पास किया है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने सभी होटल और ढाबों के स्वामियों को कोयले और मिट्टी के तेल का इस्तेमाल न करने को कहा है।
आदेश का पालन न करने पर कार्रवाई की जा सकती है। इससे पहले एनजीटी यहां की नदियों के प्रदूषित हो चुके पानी को साफ रखने के आदेश दे चुका है। गौरतलब है कि हिंडन नदी का पानी पूरी तरह जहर बन चुका है।
इसके अलावा ढमोला नदी और पांवधोई नदी के पानी में भी बड़ी मात्रा में जहर घुला है। इससे पहले एनजीटी ने सहारनपुर में होने वाले खनन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
इसके अलावा वायु प्रदूषण को रोकने के लिए नगर क्षेत्र में कचरा इकट्ठा न होने देने यहां तक की कचरे को न जलाने और धूल तक न उड़ने देने के सख्त आदेश जारी किए हुए हैं। इससे साफ है कि सहारनपुर की आबो-हवा में जहर घुला है।