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यूपी: ठगी का नया ट्रेंड... भूलकर भी मत करना ये गलती, नहीं तो चंद मिनटों में खाली हो जाएगा खाता

Tue, 13 Apr 2021 04:51 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर

सार

साइबर क्राइम करने वाले शातिरों ने ठगी का नया तरीका निकाला है। सहारनपुर पुलिस लाइन में स्थापित साइबर थाने में अब तक नौ मामले दर्ज किए गए हैं।
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साइबर क्राइम (सांकेतिक)
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विस्तार
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साइबर क्राइम करने वाले शातिरों ने ठगी का नया तरीका निकाला है। पहले तो लोन दिलाने और एटीएम कार्ड बंद होने की बात कहते हुए बैंक अधिकारी बनकर धोखा देते थे, अब खाते में जमा धनराशि की फिक्स डिपॉजिट (एफडी) करने के नाम पर ठगी की जा रही है। वारदात करने वाले शातिर बाहरी राज्यों के हैं और फर्जी पहचान पत्र से लिए गए सिम कार्ड से कॉल करते हैं। इस कारण इन तक पहुंचने में पुलिस के भी पसीने छूट रहे हैं।

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दरअसल, साइबर क्राइम करने वालों की धरपकड़ के लिए ही प्रत्येक मंडल स्तर पर साइबर थाना बनाया गया। सहारनपुर पुलिस लाइन में स्थापित साइबर थाने में अब तक नौ मामले दर्ज किए गए हैं। जिन मामलों में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई, उनकी भी संख्या काफी है।

राजस्थान और पश्चिम बंगाल की निकल रहीं आईडी
शातिर ठगों द्वारा जो मोबाइल फोन नंबर इस्तेमाल किए जा रहे हैं, उनमें बड़ी संख्या में राजस्थान और पश्चिम बंगाल के पहचान पत्र मिल रहे हैं। इसके अलावा हरियाणा और दिल्ली के भी पते सामने आ रहे हैं।
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करनाल के गिरोह भी सक्रिय
ऑनलाइन ठगी करने वालों के गिरोह करनाल (हरियाणा) से भी सक्रिय हो रहे हैं। ऐसे ही गिरोह द्वारा लोन दिलाने का झांसा देकर की गई ठगी के कारण सहारनपुर जिले के उनाली गांव निवासी शुभम ने जान दे दी थी। इस गिरोह के सदस्य हिसार निवासी कुलदीप और करनाल निवासी रवि कुमार को गिरफ्तार किया गया था, जबकि करीब 20 और साथियों के बारे में पुलिस को पता चला था।

सात महीने में पकड़े जा चुके सात गिरोह
जिले में पिछले सात महीने में करोड़ों रुपये के ऑनलाइन सट्टा कारोबार सहित सात छोटे और बड़े गिरोह पकड़े जा चुके हैं। इन गिरोह के 28 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन गिरोह में पेटीएम और वेबसाइटों पर ऑनलाइन ठगी, लोन देने के नाम पर, ऑनलाइन शॉपिंग, जेवरात बदले के नाम पर ठगी, फर्जी आईडी बनाकर दोस्तों से रकम ऐंठने के मामले सामने आ चुके हैं।

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ये सावधानी जरूरी
अनजान शख्स की कॉल, एसएमएस या सोशल मीडिया पर संदेश और लिंक का जवाब न दें। बैंक, एजेंसी, लोन ब्रांच के नाम पर किसी अनजान कॉलर को अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, आधार कार्ड या उसका नंबर, पैन कार्ड, ओटीपी ना बताएं। लोन, बीमा, पैसे दोगुने करने जैसे लालच में ना आएं।

ये हैं पुलिस की दुश्वारियां
- दूसरे राज्यों में पहुंचने के लिए अतिरिक्त टीमों और खर्च की जरूरत
- आरोपियों तक जाने के लिए बाहरी पुलिस का सहयोग नहीं मिलना
- दूसरे प्रदेश में दबिश के समय पुलिस टीम पर हमले का डर
- पुलिस के जाने से पहले ही सूचनाएं लीक होने की स्थिति
- साइबर मामलों में आरोपियों का आसानी से पता न चलना
- स्थानीय साथी पुलिस से बचने में करते हैं गिरोहों की मदद

मंडल के दो जिलों से एक भी रिपोर्ट नहीं
सहारनपुर में मंडलीय साइबर थाना है। अभी तक नौ मामले दर्ज हुए हैं, जो सभी सहारनपुर के लोगों से जुड़े हैं। मुजफ्फरनगर अथवा शामली से कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है, जबकि मंडल के तीनों जिले के लोग साइबर थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई करा सकते हैं।

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ये मामले हुए दर्ज
- खाताखेड़ी निवासी युवक के खाते से धोखाधड़ी कर 73 हजार रुपये निकाले गए।
- देवबंद निवासी व्यक्ति के खाते से तीन लाख रुपये धोखाधड़ी कर निकाले गए।
- जनकपुरी क्षेत्र की महिला की बेटी को अश्लील फोटो भेजकर ब्लैकमेल किया गया।
- सरसावा निवासी युवक से नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी कर एक लाख रुपये ठगे।
- देवबंद निवासी व्यक्ति के खाते से धोखाधड़ी करके डेढ़ लाख रुपये निकाले गए।
- सरसावा निवासी युवक के डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी कर डेढ़ लाख निकाले।
- तीतरो के रहने वाले व्यक्ति के खाते से धोखाधड़ी कर दो लाख रुपये निकाले।
- देवबंद निवासी युवक के खाते से धोखाधड़ी कर आठ लाख रुपये निकाले।
नोट : इनमें एटीएम कार्ड बंद होने, लोन दिलाने और एफडी के बहाने से रुपये ठगने के मामले भी शामिल हैं।

साइबर अपराध से बचने के लिए लोगों को खुद जागरूक रहने की जरूरत है। अनजान कॉल करने वाले से सावधान रहें, किसी को अपना आधार कार्ड नंबर, एटीएम कार्ड नंबर आदि की जानकारी साझा ना करें। - राजेश कुमार, एसपी सिटी

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