ढमोली नदी पर हुआ अवैध निर्माण।
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ढमोला नदी से अतिक्रमण हटाने के जिला प्रशासन के दावे हवाई साबित हुए हैं। प्रशासन के सुस्त पड़ जाने के बाद अतिक्रमणकारियों के हौसले फिर से बुलंद हो चले हैं। वर्तमान में भी करीब दर्जन भर जगहों पर मकानों का निर्माण चल रहा है। ऐसेे में अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं। चिंता की बात यह है कि बरसात से पहले अतिक्रमण न हटा तो फिर से बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
तीन साल पहले पहाड़ों पर भारी बारिश की वजह से ढमोला नदी उफान पर आ गई थी। पानी अधिक आने तथा नदी के तट पर अतिक्रमण होने की वजह से पानी ने खूब तबाही मचाई थी। नदी से सटी दर्जनों कॉलोनियों के घरों में आठ से दस फुट तक पानी चढ़ गया था।
दर्जनों मकान पानी में बह गए थे और लाखों रुपये की घरेलू सामान खराब हो गया था। कई लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा था। इस बार भी मौसम वैज्ञानिक अच्छे मानसून का दावा कर रहे हैं। ऐसे में यदि समय रहते नदी के तटों से अतिक्रमण न हटाया गया तो तीन साल पहले की स्थिति उत्पन्न हो जएगी। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए अमर उजाला पिछले करीब 20 दिन से इसे अभियान के तौर पर चला रहा है।
प्रशासन ने भी शुरू में इसे गंभीरता से लिया। डीएम पवन कुमार ने एडीएम वित्त को नोडल अधिकारी बनाते हुए एक कमेटी गठित की थी। एडीएम हरीशचंद्र ने नदी के तट पर जाकर अतिक्रमण का मुआयना किया था। उन्होंने माना था कि नदी के तट पर डेढ़ सौ से अधिक लोगों ने मकान बनाए हुए हैं।
अमर उजाला कार्यालय में हुई बैठक में एडीएमने हर हाल में अतिक्रमण हटाने की बात शहर के गणमान्य लोगों के समक्ष कही थी। मगर, सप्ताह भर से प्रशासन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा है। इससे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। मानसून सिर पर है। बरसात शुरू हुई तो प्रशासन के लिए अतिक्रमण हटा पाना आसान नहीं रहेगा।
अधिकारी कहिन
ढमोला नदी पर हुए अतिक्रमण को प्रशासन भूला नहीं है। नदी की जमीन से अतिक्रमण हटाना हमारी प्राथमिकता में है। यह न केवल अतिक्रमण का मामला है, बल्कि इसमें अतिक्रमणकारियों की जान का खतरा भी है। हम न तो कब्जा बरकरार रखने देंगे और न ही किसी की जान को जोखिम में डालने देंगे। शीघ्र ही प्रशासन अतिक्रमण हटवाएगा।
- पवन कुमार, डीएम।