देवबंद(सहारनपुर)। मुकद्दस रमजान का महीना आरंभ होने जा रहा है। मस्जिदों और घरों में पूरे माह तरावीह में कुरआन पाक सुनाने का सिलसिला जारी रहेगा। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने इस माह पर विस्तार से रोशनी डाली, साथ ही कुरआन पाक सुनाने वाले हाफिजों को जरूरी हिदायत दी।
रमजान माह पर रोशनी डालते हुए मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि इस माह की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अल्लाह ताआला ने कुरआन पाक को रमजान के महीने में उतारा। यही वजह है अल्लाह ने रमजान में खास इबादत का हुक्म दिया। जिसे नमाज-ए-तरावीह कहते हैं। इसमें बीस रकअत तरावीह की नमाज पूरे महीने हर दिन अदा की जाती है। उन्होंने कहा कि तरावीह में कुरआन पाक का लगातार सुनना या सुनाना सुन्नत है। कुछ दिन तरावीह में क़ुरआन पाक सुनना और उसके बाद छोड़ देना ये गलत है। पूरे रमजान तरावीह पढ़ी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुरआन को ठहराव के साथ पढ़ना चाहिए। हाफिज को चाहिए कि वे तरावीह में क़ुरआन को इस तरह सुनाए की उसका हर एक अल्फाज (शब्द) समझ में आए। जो लोग इसका ख्याल नहीं रखते तो क़ुरआन उन पर लानत भेजता है। मुफ्ती अबुल कासिम ने कहा कि रमजान ही नहीं बल्कि क़ुरआन की तिलावत पूरे साल इस तरह करनी चाहिए कि रमजान में खास तौर पर इसके लिए तैयारियां न करनी पड़े। उन्होंने कहा कि हदीस है कि कुरआन की निगरानी करते रहो, क्योंकि कुरआन सीनों से उससे ज्यादा तेजी के साथ निकल जाता है, जितनी तेजी से जानवर अपनी रस्सी छुड़ाकर भाग जाता है। इसलिए मोहताज बनकर रहेंगे तो क़ुरआन हमारे सीनों में महफूज रहेगा।
मौलाना नोमानी ने कहा कि हाफिज-ए-क़ुरआन एक इमाम भी होता है। इसलिए उसे अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और अपने उस ओहदे के मुताबिक ही अमल करना चाहिए। क्योंकि अगर इमाम की नमाज सही होगी तो ही सबकी नमाज सही होगी। इसके साथ ही मोहतमिम ने ये भी कहा कि पांचों वक्त की नमाज की पाबंदी करें और दूसरों को भी नमाज की तरफ लेकर जाएं।