ईद-उल-अजहा: मंडी समिति रोड पर लगी मंडी बकरे देखते लोग।
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सहारनपुर। ईद-उल-अजहा (बकरीद) आने में सात से आठ दिन ही बचे हैं। कोरोना काल में ईद पर सामूहिक नमाज और कुर्बानी को लेकर सरकार की ओर से कोई गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। ऐसे में मुस्लिम वर्ग असमंजस में है। वहीं कुर्बानी के पशु बेचने वाले कारोबारी भी चिंतित हैं। कारोबारियों का कहना है कि बीते वर्ष पांच करोड़ से अधिक के पशु बिके थे। इस बार उन्हें नुकसान की चिंता सता रही है।
ईद-उल-अजहा पर मुस्लिम समाज के लोग पशुओं की कुर्बानी देते हैं। महानगर में कंबोहान का पुल, बेहट रोड, अरबी मदरसा, मंडी समिति और कमेला कॉलोनी में पशु मंडी लगती है, जहां ईद से एक सप्ताह पहले ही पशुओं की खरीदारी शुरू हो जाती है। दस हजार से लेकर एक लाख रुपये तक अलग-अलग नस्लों के बकरे बिकते हैं, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से लोग अभी कुर्बानी के लिए बकरा नहीं खरीद रहे हैं, जिस कारण पशु कारोबारी चिंतित नजर आ रहे हैं।
विभिन्न नस्लों के बिकते हैं बकरे
मंडी समिति रोड के बकरा कारोबारी सईद अहमद का कहना है कि उनके यहां हर नस्ल के बकरे आते हैं। इनमें तोतापरी, अमृतसरी, राजस्थानी की मांग ज्यादा होती है, लेकिन इस बार बकरे नहीं बिक रहे हैं। चिलकाना रोड धतौली रांग के कारोबारी मंसूर अहमद का कहना है कि जिले में बीते वर्ष पांच करोड़ से अधिक के पशुओं की बिक्री हुई थी। उन्होंने सरकार से गाइडलाइन जारी करने की मांग की है।
लोगों का बजट भी बिगड़ा
नदीम कॉलोनी निवासी पशु कारोबारी हाजी इरफान का कहना है कि कोरोना काल का असर ईद-उल-अजहा पर पड़ा है। पिछले दिनों रहे लॉकडाउन की वजह से लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हुई है, जिस कारण बजट बिगड़ गया है और कुर्बानी के लिए पशु नहीं खरीद पा रहे हैं।