सहारनपुर। नगर निगम प्रशासन अडिग, दो हजार सफाईकर्मी हड़ताल पर और जनता गंदगी से बेहाल। महानगर में पिछले तीन दिन से यही चल रहा है। 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने के विरोध में सफाईकर्मी छह दिन से आंदोलन कर रहे हैं, जिसमें वह तीन दिन से हड़ताल पर हैं। महापौर, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी और अन्य कोई जनप्रतिनिधि उनकी सुनने को उनके बीच नहीं गया है। ऐसे में हड़ताल का खामियाजा जनता भुगत रही है।
हड़ताल के तीसरे दिन भी सफाईकर्मियों ने काम ठप कर नगर निगम में दोपहर तक धरना दिया। उन्होंने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोनी आजाद ने आरोप लगाया कि जो नेता वाल्मीकि समाज के वोट से जीतकर लोकसभा और विधानसभा जाते हैं वह भी उनकी पीड़ा को समझ नहीं रहे हैं। निगम प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी या महापौर ने भी अभी तक उनकी सुध नहीं ली है।
आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए सफाई व्यवस्था को ठेके पर देना चाहता है। इसीलिए सफाई कर्मचारियों के हितों काे अनदेखा किया जा रहा है। धरने में विनोद घावरी, बृजमोहन चिनालिया, धीरज आजाद, अशोक तेश्वर, साथी लक्ष्मण सिंह, कंवलदास, नीरज, अमन, गौरव, विकास, दीपक आदि रहे।
पूरे शहर में गंदगी के ढेर लगे
हड़ताल की वजह से डलाव घरों से कचरा नहीं उठ रहा है। डलाव घरों का कचरा फैलकर सड़कों तक आ गया है, जो नगर निगम की गाड़ियां घर-घर से कचरा इकट्ठा करती हैं वह भी नहीं पहुंच रही हैं। ऐसे में घरों पर भी कचरा जमा हो रहा है। कई लोग कचरे को सड़कों के किनारे फेंक रहे हैं। शहर के सबसे बड़े और व्यस्त बाजार नेहरू मार्केट, शहीद गंज, सराफा बाजार, कोर्ट रोड, रायवाला, सब्जी मंडी आदि में सड़कें कचरे से पट गईं हैं। कुछ लोग नाक पर रुमाल रखकर चल रहे हैं।
सफाई की नई व्यवस्था नागरिकों और शहर के हित में है। सबसे बड़ी बात करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा, जिससे उनके परिवार की स्थिति सुधरेगी। वाहनों के डीजल में होने वाली चोरी रुकेगी। सफाई कर्मचारियों को चाहिए कि वह नई व्यवस्था को गंभीरता से समझें तब निर्णय लें। - डॉ. अजय कुमार, महापौर