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Saharanpur: मुगलकालीन सिक्के देख लोग हैरान, नींव खुदाई के दौरान निकला खजाना, लाखों में हैं कीमत

Mon, 22 May 2023 10:18 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर

सार

Saharanpur News : खुदाई के दौरान निकले मुगलकालीन सिक्के देखकर लोग हैरान रह गए। बताया गया कि ये करीब 350 साल पुराने सिक्के हैं और इनकी कीमत लाखों रुपये में हैं।
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नींव की खुदाई के दौरान मुगलकालीन सिक्के निकले। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहारनपुर में नानौता क्षेत्र के गांव हुसैनपुर में भूमिया खेड़ा की चारदीवारी के लिए खोदी जा रही नींव के दौरान मुगलकालीन सिक्के निकले हैं, जो चांदी के बने हैं। प्रत्येक सिक्के का बाजार मूल्य 3.5 हजार रुपये तक आंका गया है। ज्यादातर सिक्के 350 साल से अधिक पुराने हैं। सिक्कों को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस सक्रिय हो गए हैं। पुलिस ने उक्त स्थल को अपनी निगरानी में लिया है।

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हुसैनपुर में भूमिया खेड़ा है, जिसकी बगल में सती स्थल भी है। इसे लेकर ग्रामीणों में मान्यता है और वह पूजापाठ करते हैं। परिसर की चारदीवारी कराने का कार्य चल रहा है। जेसीबी से नींव खोदी गई, लेकिन उस समय किसी को सिक्कों का पता नहीं चला। शाम को बच्चों को ये सिक्के मिले तो ग्रामीण मौके पर पहुंचे। 

ग्राम प्रधान प्रमोद कुमार, पूर्व प्रधान हेम सिंह और रोहित कुमार ने सिक्के पुलिस को सौंप दिए। थाना प्रभारी चंद्रसेन सैनी ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए सिक्कों की संख्या 401 है, जो तहसीलदार को सौंप दिए गए हैं। मौके पर पहुंचे लेखपाल अमित कुमार ने बताया कि भूमिया खेड़ा की भूमि देव स्थल के नाम से दर्ज है।

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उधर, लेखक एवं इतिहास के जानकार राजीव उपाध्याय यायावर ने बताया कि हुसैनपुर से निकले अधिकांश सिक्के मुगल बादशाह मोहम्मद शाह आलम द्वितीय के समय के हैं। शाह आलम का जन्म 1728 को हुआ और मृत्यु 1806 में हुई थी। मोहम्मद शाह आलम आलमगीर द्वितीय के पुत्र थे। उन्होंने बताया कि सिक्के चांदी के बने हैं, जिन पर फारसी में लिखा है। 

उन्होंने बताया कि सहारनपुर में कभी टकसाल हुआ करती थीं, जिनमें सिक्के बनते थे। टकसाल बादशाह अकबर द्वारा स्थापित कराई गई थी। अकबर द्वारा सहारनपुर को सरकार का दर्जा दिया गया था, जिसके परिक्षेत्र में यमुनानगर से लेकर देहरादून, हरिद्वार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा आता था। इन्हीं सिक्कों को इस क्षेत्र में आने वाले मराठों ने भी इस्तेमाल किया था। उन्होंने बताया कि ज्यादातर सिक्के 350 साल या उससे अधिक पुराने हैं।

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लाखों रुपये है 401 सिक्कों की कीमत
राजीव उपाध्याय ने बताया कि मुगलकालीन चांदी के एक सिक्के का वजन 11 ग्राम से अधिक है, जिसकी बाजार कीमत 3.5 हजार रुपये तक है। जो सिक्के प्राप्त हुए हैं, वह बेहद अच्छी स्थिति में हैं। इस लिहाज से 401 सिक्कों की कीमत लाखों रुपये में बैठती है।

निश्चल गिरि की समाधि
ग्रामीण 75 वर्षीय राजबीर सिंह ने बताया कि करीब 350 साल पूर्व उनके पूर्वज निकटवर्ती गांव संबलहेड़ी से आकर यहां बसे थे। यहां बांस के जंगल थे, जिनमें गोसाईं मठ था, जो आज भी है। उन्होंने बताया कि मठ की देखभाल महात्मा निश्चल गिरि द्वारा की जाती थी। उनकी मृत्यु के बाद उनकी समाधि यहां बना दी गई। उनका दावा है कि समाधि के नीचे से सिक्के निकले हैं।

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हुसैनपुर के उक्त स्थल को लेकर नायब तहसीलदार को जिम्मेदारी दी गई है। सिक्के डबल लॉक में रखवा दिए गए हैं। साथ ही जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पुरातत्व विभाग को अवगत कराने के लिए आग्रह किया गया है। पुरातत्व विभाग ही बता पाएगा कि सिक्के किस काल के हैं। - संगीता राघव, एसडीएम, रामपुर मनिहारान
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