-वाहनों पर प्रति माह खर्च हो रहा था 70 से 80 लाख रुपये का डीजल, कई बार उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। चौतरफा सवालों से घिरने के बाद नगर निगम ने वाहनों में डाले जाने वाले डीजल के खर्च को आधे से भी कम पर ला दिया है। पहले जहां प्रति माह 70 से 80 लाख रुपये डीजल पर खर्च होते थे, वहीं अब यह खर्च घटकर एकदम 30 लाख पर आ गया है। ऐसा व्यवस्था बदलने की वजह से हुआ है।
महानगर में सफाई व्यवस्था बनाने के लिए कर्मचारियों के साथ ही बड़ी संख्या में वाहन भी लगे हैं, जिनमें जेसबी, ट्रक, रोबोट मशीन, टेंपो, छोटा हाथी, पोकलेन मशीन सहित कई वाहन हैं, जिनकी संख्या 150 से अधिक है। इन वाहनों में अंबाला रोड स्थित एक डीजल पंप से डीजल डालने की व्यवस्था रही है। बीते वर्षों में प्रतिमाह 70 से 80 लाख रुपये तक का डीजल खर्च हुआ है। इस पर नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी हंगामा हो चुका है। जिसके बाद जांच समिति बनाई गई थी, जिसमें सहायक नगरायुक्त और पार्षदों तक को शामिल किया गया था, लेकिन जांच अभी तक लटकी हुई है। इसके अलावा समय-समय पर अन्य स्तर से भी सवाल उठते रहे हैं। करीब 15 दिन पहले नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुनाल जैन को व्यवस्था में बदलाव और सुधार के निर्देश दिए थे। डॉ. कुनाल जैन ने सबसे पहले डीजल पंप बदला। पुराने डीजल पंप से केवल छोटे वाहनों में डीजल डाला जा रहा है, जबकि बड़े वाहनों के लिए अलग पंप के साथ अनुबंध किया गया है, साथ ही नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने डीजल के खर्च की जिम्मेदारी भी अन्य अधिकारियों को दी है। जिसका नतीजा यह हुआ है कि इस बार डीजल का मासिक खर्च 30 लाख रुपये आया है। छोटे वाहनों में खर्च होने वाले डीजल का एक माह का खर्च छह लाख रुपये तथा बड़े वाहनों का 15 दिन का खर्च 12 लाख रुपये आया है। यानी एक दम से 40 से 50 लाख रुपये की कमी आना पूर्व की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
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सफाई में लगे वाहन संख्या
कुल वाहन करीब 100
कचरा भरने के लिए जेसीबी 08 जेसीबी
कचरा उठान के लिए ट्रक 13
रोबोट मशीन 02
पोकलेन- 04
टेंपो, छोटा हाथी आदि 73
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डीजल खर्च को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डीजल पंप बदला गया है, साथ ही नलकूपों को सौर ऊर्जा से चलाने की व्यवस्था की जा रही है। हमारा प्रयास यही है कि डीजल के खर्च को और कम किया जाए।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त