सहारनपुर। लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद मोदी का जिले में पहला आगमन कई मायनों में खास है। इस बार उनका दौरा पारंपरिक जनसभा से अलग, पूरी तरह रणनीति के तहत तैयार किया गया नजर आता है। गणेशपुर में हो रहे आयोजन में वह मंच पर नहीं आएंगे, बल्कि हेलीपैड से ही डाट काली मंदिर होते हुए देहरादून रवाना हो जाएंगे। वहां पर जनसभा करेंगे, जिसका लाइव प्रसारण यहां दिखाया जाएगा, जबकि गणेशपुर में मंच की कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संभालेंगे। यह पूरा कार्यक्रम केवल एक जिले तक सीमित नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों को साधने की सियासी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
जिले में प्रधानमंत्री का फोकस इस बार मंच की बजाय तय कार्यक्रम, जैसे एक्सप्रेसवे से जुड़े आयोजन, डाट काली मंदिर दर्शन और सीमित रोड शो पर रहेगा। गणेशपुर से थोड़ी दूर तक खुली गाड़ी में यात्रा और रास्ते में फूलों की वर्षा जैसे आयोजन, सीधे तौर पर जनसंपर्क का संदेश तो देंगे, लेकिन सहारनपुर में मंच से संबोधन न होना इस दौरे को अलग बनाता है। राजनीतिक तौर पर इसे एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के लोकार्पण में सहारनपुर से यूपी और देहरादून के बहाने उत्तराखंड को साधने का प्रयास रहेगा। बताया जा रहा है कि देहरादून में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण यहां पर दिखाया जाएगा। वहीं, इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी और एक्सप्रेसवे पर उनकी यात्रा, विकास एजेंडे को और मजबूती देगी।
जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन क्षेत्रीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने और संगठनात्मक मजबूती का संकेत देता है। इससे भाजपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि केंद्र और राज्य के बीच तालमेल मजबूत है और राज्य नेतृत्व भी जनता के बीच उतना ही प्रभावी है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह दौरा सियासत के पारंपरिक ढर्रे से हटकर रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में नए राजनीतिक ट्रेंड का संकेत भी दे सकता है। बता दें, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान 6 अप्रैल 2024 को सहारनपुर आए थे। उन्होंने दिल्ली रोड पर जनसभा को संबोधित किया था।