सवाल : मुजफ्फरनगर निवासी अरशद ने पूछा कि सोशल मीडिया का जमाना है, हर व्यक्ति के पास स्मार्ट फोन है। ज्यादातर लोग रोजे की हालत में मोबाइल पर गेम खेलते हैं, या सोशल मीडिया पर रहते हैं। यहां तक हमारी पड़ोस की मस्जिद में नमाज के बाद और नमाज से पहले भी लोग मोबाइल फोन का प्रयोग करते देखे जाते हैं, जो अपना ज्यादा समय मोबाइल फोन इस्तेमाल करने में बिताते हैं?
जवाब : जो लोग रमजान का एहतराम (सम्मान) नहीं करते वो उसकी फजीलत से महरूम (वंचित) हो जाते हैं। शरीयत में आया है कि रमजान पवित्र महीना है और इसका हर एक लम्हा बहुत कीमती है। इस समय को दूसरी चीजों में जाया नहीं करना चाहिए, जो लोग मस्जिद में मोबाइल फोन का प्रयोग करते नजर आते हैं, उनको यह बात अच्छे से समझ लेनी चाहिए कि मस्जिद अल्लाह का घर है, इबादत की जगह है। इसका एहतराम करना हर व्यक्ति पर वाजिब है।