जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब का अपमान करने के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने वालों पर घोर अत्याचार किया गया, लेकिन अग्निपथ योजना के विरोध में हिंसक प्रदर्शन कर देश के सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति को नष्ट करने वालों पर कार्रवाई न होना सरकार के दोहरे चरित्र को दर्शाता है।
सोमवार को नई दिल्ली स्थित जमीयत मुख्यालय पर कार्यसमिति की बैठक में मौलाना अरशद मदनी को सर्वसम्मति से अगले टर्म के लिए संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। बैठक में देश की वर्तमान परिस्थितियों पर विचार विमर्श के दौरान मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में अशांति, अराजकता और सांप्रदायिकता चरम पर है। अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों से देश के अंदर उनके संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार छीने जा रहे हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को देशद्रोह की संज्ञा देकर कानून की आड़ में मुस्लिमों पर गोलियां और लाठियां बरसाईं जा रही हैं। उनके घरों पर बुलडोजर चलवाए जा रहे हैं, जबकि अग्निपथ योजना के विरोध में सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन करते हुए रेल गाड़ियां व स्टेशनों को जलाने वालों पर हल्का लाठी चार्ज भी नहीं किया गया। यह शासन प्रशासन के दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
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मौलाना मदनी ने कहा कि धर्म का नशा पिलाकर जनता को बहुत दिनों तक मूल समस्याओं से गुमराह नहीं किया जा सकता है। रोटी कपड़ा और मकान व्यक्ति की जरूरत हैं। जिसे अनदेखा करना देश के विकास के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
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